1. हैंड शंटिंग (Hand Shunting)
हैंड शंटिंग शंटिंग की सबसे सरल एवं पारंपरिक विधि है। इसमें किसी इंजन अथवा अन्य शक्ति-स्रोत का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि आवश्यक संख्या में कर्मचारी अपने शारीरिक बल (Man Power) से किसी वाहन अथवा वाहनों को धक्का देकर निर्धारित स्थान तक पहुँचाते हैं।
भारतीय रेल में हैंड शंटिंग का उपयोग केवल उन्हीं स्थानों पर किया जाता है जहाँ यह पूर्णतः सुरक्षित हो तथा परिचालन की दृष्टि से उपयुक्त माना जाए। छोटे यार्ड, रिपेयर लाइन, कोचिंग डिपो, गुड्स शेड अथवा ऐसे स्थान जहाँ इंजन उपलब्ध कराना व्यावहारिक न हो, वहाँ सीमित स्तर पर हैंड शंटिंग की जाती है।
वर्तमान समय में यांत्रिक साधनों के व्यापक उपयोग के कारण इसका प्रयोग पहले की अपेक्षा बहुत कम हो गया है, फिर भी कुछ परिस्थितियों में इसकी आवश्यकता बनी रहती है।
हैंड शंटिंग का सिद्धांत
हैंड शंटिंग का मूल सिद्धांत यह है कि वाहन को पूर्ण नियंत्रण में रखते हुए केवल मानव शक्ति से स्थानांतरित किया जाए। वाहन को धक्का देते समय उसकी गति इतनी ही रखी जाती है कि आवश्यकता पड़ने पर उसे तुरंत रोका जा सके। किसी भी स्थिति में वाहन को अनियंत्रित होकर चलने नहीं दिया जाता।
हैंड शंटिंग सदैव समतल अथवा सुरक्षित लाइन पर की जानी चाहिए। जहाँ ढाल अधिक हो अथवा वाहन के नियंत्रण से बाहर जाने की संभावना हो, वहाँ हैंड शंटिंग नहीं की जाती।
हैंड शंटिंग की प्रक्रिया
हैंड शंटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व संबंधित कर्मचारी यह सुनिश्चित करता है कि जिस लाइन पर वाहन ले जाना है, वह पूरी तरह खाली है। संबंधित पॉइंट सही स्थिति में हैं तथा आगे किसी प्रकार की बाधा नहीं है। यदि वाहन किसी अन्य वाहन से जुड़ा है, तो पहले उसे सुरक्षित रूप से अलग किया जाता है।
इसके बाद अधिकृत कर्मचारी शंटिंग में भाग लेने वाले कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश देता है। प्रत्येक कर्मचारी को यह बताया जाता है कि वाहन को किस दिशा में ले जाना है, कहाँ रोकना है तथा संकेत कौन देगा। निर्देश स्पष्ट होने के बाद कर्मचारी वाहन के निर्धारित स्थान पर खड़े होकर नियंत्रित रूप से धक्का देना प्रारम्भ करते हैं।
वाहन को धक्का देते समय किसी भी कर्मचारी को बफरों के बीच खड़े होकर बल नहीं लगाना चाहिए। इसी प्रकार चल रहे वाहन के सामने अथवा पहियों के निकट खड़ा होना भी अत्यंत खतरनाक है। वाहन निर्धारित स्थान पर पहुँचने के बाद उसे तुरंत हैंड ब्रेक द्वारा सुरक्षित किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर व्हील स्कॉच अथवा अन्य स्वीकृत साधनों का भी उपयोग किया जाता है, जिससे वाहन पुनः गति न कर सके।
हैंड शंटिंग करते समय अपनाई जाने वाली सावधानियाँ
हैंड शंटिंग सदैव किसी अधिकृत परिचालन कर्मचारी के प्रत्यक्ष नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में ही की जानी चाहिए। प्रत्येक कर्मचारी को शंटिंग प्रारम्भ होने से पूर्व कार्य का स्पष्ट निर्देश दिया जाना आवश्यक है। यदि किसी कर्मचारी को निर्देश समझ में न आएँ, तो पहले स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए और उसके बाद ही कार्य प्रारम्भ किया जाए।
हैंड शंटिंग के समय वाहन को धक्का देते हुए कर्मचारी सदैव वाहन के किनारे अथवा निर्धारित सुरक्षित स्थान पर रहें। बफरों के बीच से धक्का देना, चलती हुई स्थिति में वाहन पर चढ़ना अथवा वाहन के सामने चलना पूर्णतः असुरक्षित है।
यदि लाइन पर ढाल (Gradient) अधिक हो, वर्षा के कारण रेल पथ फिसलनयुक्त हो अथवा वाहन के नियंत्रण से बाहर जाने की संभावना हो, तो हैंड शंटिंग नहीं की जानी चाहिए। ऐसे स्थानों पर इंजन द्वारा नियंत्रित शंटिंग ही सुरक्षित मानी जाती है।
शंटिंग पूर्ण होने के बाद यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वाहन पूरी तरह सुरक्षित है तथा उसके स्वतः चलने (Run Away) की कोई संभावना नहीं है।
हैंड शंटिंग कहाँ नहीं की जानी चाहिए
जहाँ स्टेशन अथवा यार्ड में ढाल अधिक हो, वहाँ हैंड शंटिंग सामान्यतः प्रतिबंधित रहती है। इसी प्रकार भारी रेक, अत्यधिक भार वाले वैगन, खतरनाक माल से लदे वाहन अथवा ऐसे स्थान जहाँ पर्याप्त नियंत्रण संभव न हो, वहाँ भी हैंड शंटिंग नहीं की जाती।
यदि स्थानीय Subsidiary Rules अथवा Station Working Rules किसी विशेष स्थान पर हैंड शंटिंग पर प्रतिबंध लगाते हों, तो उनका पालन करना अनिवार्य होता है।
हैंड शंटिंग के लाभ
हैंड शंटिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें इंजन अथवा ईंधन की आवश्यकता नहीं होती। छोटे यार्डों एवं सीमित दूरी के लिए यह अपेक्षाकृत कम खर्चीली विधि है। जहाँ शंटिंग की आवश्यकता बहुत कम होती है, वहाँ इंजन उपलब्ध कराने की अपेक्षा हैंड शंटिंग अधिक व्यावहारिक सिद्ध हो सकती है।
हैंड शंटिंग की सीमाएँ
हैंड शंटिंग पूर्णतः मानव शक्ति पर आधारित होने के कारण इसमें अधिक श्रम एवं समय लगता है। भारी वैगनों अथवा लंबी रेक के लिए यह उपयुक्त नहीं है। यदि पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध न हों अथवा कार्य का समुचित समन्वय न हो, तो दुर्घटना की संभावना भी बढ़ सकती है।
इसी कारण आधुनिक रेलवे परिचालन में इसका उपयोग केवल सीमित परिस्थितियों तक ही रखा गया है तथा जहाँ संभव हो, इंजन द्वारा नियंत्रित शंटिंग को प्राथमिकता दी जाती है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
हैंड शंटिंग की परिभाषा, उपयोग, सावधानियाँ तथा प्रतिबंध विभागीय परीक्षाओं में प्रायः पूछे जाते हैं। विशेष रूप से यह ध्यान रखना चाहिए कि हैंड शंटिंग केवल अधिकृत कर्मचारी के पर्यवेक्षण में ही की जाती है तथा जहाँ ढाल अधिक हो वहाँ इसकी अनुमति नहीं होती। वाहन को सुरक्षित करना तथा कर्मचारियों की व्यक्तिगत सुरक्षा इस प्रकार की शंटिंग का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है।

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