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TRAIN DELAYED IN BLOCK SECTION
खंड क्षमता और थ्रू-पुट में अंतर (Section Capacity & Throughput)
| खंड क्षमता (Section Capacity) | थ्रू-पुट (Throughput) |
|---|---|
| 1. 24 घंटे में किसी रेल खंड पर सुरक्षित एवं समयबद्ध रूप से चलाई जा सकने वाली गाड़ियों की अधिकतम संख्या को खंड क्षमता कहते हैं। | 1. 24 घंटे में किसी रेल खंड द्वारा वहन किए गए कुल यातायात (विशेषकर माल यातायात) को थ्रू-पुट कहते हैं। |
| 2. इसकी गणना करते समय यात्री, माल एवं अन्य सभी प्रकार की गाड़ियों को ध्यान में रखा जाता है। | 2. इसकी गणना करते समय माल की मात्रा, GTKM, NTKM अथवा यात्रियों की संख्या एवं दूरी को ध्यान में रखा जाता है। |
| 3. इसका संबंध मुख्यतः गाड़ियों की संख्या से होता है। | 3. इसका संबंध ढोए गए यातायात की मात्रा से होता है। |
| 4. इसका उद्देश्य रेल खंड की परिचालन क्षमता का निर्धारण करना है। | 4. इसका उद्देश्य रेल खंड द्वारा वहन किए गए वास्तविक यातायात का आकलन करना है। |
| 5. खंड क्षमता बढ़ाने के लिए सिग्नलिंग, ट्रैक, लूप लाइन एवं परिचालन सुधार आवश्यक होते हैं। | 5. प्रति ट्रेन लोड, Long Haul, Heavy Haul, DFC एवं उच्च क्षमता वाले वैगनों द्वारा थ्रू-पुट बढ़ाया जा सकता है। |
| 6. खंड क्षमता एक सीमा के बाद संतृप्त (Saturated) हो सकती है। | 6. खंड क्षमता बढ़ाए बिना भी प्रति ट्रेन लोड बढ़ाकर थ्रू-पुट बढ़ाया जा सकता है। |
"Section Capacity का संबंध गाड़ियों की संख्या से है, जबकि Throughput का संबंध ढोए गए यातायात (Traffic Carried) से है।"
कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड (KRCL) (For LDCE)
कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड (KRCL)
कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड (Konkan Railway Corporation Limited – KRCL) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है। इसकी स्थापना वर्ष 1990 में भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में रोहा (महाराष्ट्र) से मंगलुरु (कर्नाटक) तक नई रेलवे लाइन के निर्माण, अनुरक्षण एवं परिचालन के उद्देश्य से की गई थी।
यह भारतीय रेलवे के इतिहास की सबसे चुनौतीपूर्ण रेल परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। कोंकण रेलवे के निर्माण ने पश्चिमी तट के दुर्गम क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने का कार्य किया तथा भारत के रेल अवसंरचना विकास में एक नया अध्याय जोड़ा।
Advance Transportation - थ्रू -पुट / THROUGH PUT
थ्रू-पुट (Throughput)
रेलवे परिचालन में किसी रेल खंड (Section) की कार्यकुशलता का आकलन करने के लिए थ्रू-पुट (Throughput) एक महत्वपूर्ण संकेतक (Performance Indicator) है। सामान्यतः किसी निश्चित अवधि, विशेषकर 24 घंटे में, किसी रेल खंड द्वारा वहन किए गए यातायात की मात्रा को उस खंड का थ्रू-पुट कहा जाता है।
थ्रू-पुट का उपयोग किसी रेल खंड की वास्तविक वहन क्षमता, परिचालन दक्षता तथा उपलब्ध अवसंरचना के उपयोग का आकलन करने के लिए किया जाता है। यह यात्री एवं माल दोनों प्रकार के यातायात पर लागू होता है, किन्तु माल परिचालन में इसका महत्व अधिक माना जाता है।
थ्रू-पुट की अवधारणा
रेलवे द्वारा किसी खंड पर जितना अधिक यातायात सुरक्षित एवं समयबद्ध रूप से संचालित किया जाता है, उस खंड का थ्रू-पुट उतना ही अधिक माना जाता है।
माल यातायात के संदर्भ में थ्रू-पुट का आकलन सामान्यतः निम्न आधारों पर किया जाता है—
संचालित वैगनों की संख्या
GTKM (Gross Tonne Kilometre)
NTKM (Net Tonne Kilometre)
इनमें से NTKM को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह वास्तविक भुगतान योग्य माल की ढुलाई को प्रदर्शित करता है।
माल थ्रू-पुट (Goods Throughput)
माल थ्रू-पुट किसी खंड में एक निश्चित अवधि में ढोए गए माल की मात्रा को दर्शाता है।
इसे निम्नलिखित आधारों पर व्यक्त किया जा सकता है—
1. वैगनों की संख्या
किसी खंड से गुजरने वाले कुल माल वैगनों की संख्या।
2. GTKM (Gross Tonne Kilometre)
ग्रॉस टन किलोमीटर में वैगनों, माल एवं स्वयं वैगन के भार सहित कुल वहन क्षमता को दर्शाया जाता है।
3. NTKM (Net Tonne Kilometre)
नेट टन किलोमीटर वास्तविक माल (Paying Load) की ढुलाई को दर्शाता है।
रेलवे योजनाओं, माल परिवहन प्रदर्शन तथा राजस्व विश्लेषण में सामान्यतः NTKM का उपयोग किया जाता है।
पैसेंजर थ्रू-पुट (Passenger Throughput)
पैसेंजर थ्रू-पुट किसी खंड पर ढोए गए यात्रियों की संख्या एवं उनके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
सूत्र
Passenger Throughput = यात्रियों की संख्या × तय की गई दूरी (किमी)
यह किसी रेल खंड की यात्री परिवहन क्षमता का संकेत देता है।
रेल ट्रैक थ्रू-पुट
रेल ट्रैक थ्रू-पुट का संबंध मुख्य रूप से Gross Million Tonnes (GMT) से होता है।
GMT के आधार पर—
रेल पथ की आयु का निर्धारण
ट्रैक अनुरक्षण योजना
रेल नवीनीकरण कार्यक्रम
अल्ट्रासोनिक परीक्षण
ट्रैक क्षमता विश्लेषण
किए जाते हैं।
थ्रू-पुट एवं खंड क्षमता का संबंध
खंड क्षमता (Section Capacity) तथा थ्रू-पुट में घनिष्ठ संबंध होता है, किन्तु दोनों समान नहीं हैं।
खंड क्षमता किसी रेल खंड पर संचालित की जा सकने वाली गाड़ियों की अधिकतम संख्या को दर्शाती है, जबकि थ्रू-पुट उस खंड द्वारा वास्तविक रूप से वहन किए गए यातायात को दर्शाता है।
कई बार खंड क्षमता बढ़ाए बिना भी प्रति ट्रेन लोड बढ़ाकर थ्रू-पुट में वृद्धि की जा सकती है।
थ्रू-पुट बढ़ाने के उपाय
1. प्रति ट्रेन लोड बढ़ाकर
थ्रू-पुट बढ़ाने का सबसे प्रभावी उपाय प्रति ट्रेन वहन किए जाने वाले भार को बढ़ाना है।
इसके लिए—
उच्च क्षमता वाले वैगनों का उपयोग
उच्च एक्सल लोड
BOXNHL, BOBRN, BOBSN जैसे आधुनिक वैगनों का उपयोग
वैगन टेयर वेट में कमी
महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. Long Haul एवं Heavy Haul संचालन
वर्तमान भारतीय रेलवे में थ्रू-पुट बढ़ाने हेतु Long Haul तथा Heavy Haul ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
Python तथा Anaconda जैसी Long Haul Trains के माध्यम से एक ही ट्रेन पथ में अधिक माल ढोया जा सकता है।
Heavy Haul Operation के माध्यम से उच्च एक्सल लोड वाली मालगाड़ियों का संचालन किया जाता है।
3. Dedicated Freight Corridor (DFC)
Dedicated Freight Corridors के परिचालन से मालगाड़ियों की औसत गति, वहन क्षमता तथा थ्रू-पुट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
DFC पर—
अधिक लंबी गाड़ियाँ
अधिक भार
अधिक गति
संभव हो पाई है।
4. उच्च क्षमता वाले लोकोमोटिव
उच्च हॉर्स पावर वाले विद्युत लोकोमोटिवों के उपयोग से अधिक भार वाली मालगाड़ियों का संचालन संभव हुआ है।
WAG-9, WAG-12 तथा अन्य आधुनिक माल इंजन थ्रू-पुट वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
5. Distributed Power System (DPS)
Distributed Power System के उपयोग से लंबी एवं भारी मालगाड़ियों का सुरक्षित संचालन संभव होता है।
इससे—
ड्रॉबार बल कम होता है।
ट्रेन पार्टिंग की संभावना कम होती है।
अधिक भार ढोया जा सकता है।
6. लूप लाइन क्षमता में वृद्धि
लंबी मालगाड़ियों के संचालन हेतु पर्याप्त लंबाई वाली लूप लाइनों का निर्माण आवश्यक है।
Long Haul एवं Heavy Haul Operation के लिए लूप लाइन क्षमता बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
7. टर्मिनल दक्षता में सुधार
लोडिंग एवं अनलोडिंग समय कम करके भी थ्रू-पुट बढ़ाया जा सकता है।
इसके लिए—
यांत्रिक लोडिंग
Rapid Loading System
Mechanised Handling
Automatic Wagon Loading
का उपयोग किया जाता है।
8. वैगन टर्न राउंड समय कम करना
वर्तमान रेलवे परिचालन में Wagon Turn Round Time एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन सूचकांक है।
वैगनों की शीघ्र उपलब्धता से अधिक माल ढुलाई संभव होती है तथा थ्रू-पुट बढ़ता है।
9. सिग्नलिंग एवं संचार प्रणाली में सुधार
आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली, Automatic Block Signalling, Electronic Interlocking तथा केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण (CTC) के माध्यम से रेल खंड की क्षमता एवं थ्रू-पुट दोनों में वृद्धि की जा सकती है।
10. FOIS आधारित माल परिचालन
Freight Operations Information System (FOIS) के माध्यम से—
Wagon Tracking
Rake Management
Loading Monitoring
Detention Analysis
अधिक प्रभावी रूप से किया जा सकता है, जिससे थ्रू-पुट में वृद्धि होती है।
थ्रू-पुट रेलवे परिचालन का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन संकेतक है, जो किसी रेल खंड की वास्तविक वहन क्षमता को प्रदर्शित करता है। आधुनिक भारतीय रेलवे में Long Haul Operation, Heavy Haul Operation, Dedicated Freight Corridor, Distributed Power System, उच्च क्षमता वाले वैगन एवं FOIS आधारित प्रबंधन के माध्यम से थ्रू-पुट में निरंतर वृद्धि की जा रही है। भविष्य में माल परिवहन क्षमता बढ़ाने के लिए थ्रू-पुट वृद्धि रेलवे की प्रमुख रणनीति बनी रहेगी।
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) (For LDCE)
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL)
रेल विकास निगम लिमिटेड (Rail Vikas Nigam Limited – RVNL) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (Public Sector Undertaking – PSU) है। इसकी स्थापना वर्ष 2003 में भारतीय रेलवे की अवसंरचना क्षमता बढ़ाने, रेल परियोजनाओं को तीव्र गति से पूरा करने तथा गैर-बजटीय संसाधनों (Extra Budgetary Resources) के माध्यम से वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से की गई थी।
RVNL भारतीय रेलवे की प्रमुख परियोजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle – SPV) के रूप में कार्य करता है।
भारतीय रेलटेल निगम लिमिटेड (RailTel Corporation of India Limited) (For LDCE)
भारतीय रेलटेल निगम लिमिटेड (RailTel Corporation of India Limited)
भारतीय रेलटेल निगम लिमिटेड (RailTel Corporation of India Limited) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है। इसकी स्थापना भारतीय रेलवे के पास उपलब्ध विशाल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (Optical Fiber Network) एवं मार्गाधिकार (Right of Way) का उपयोग करके देशव्यापी दूरसंचार एवं ब्रॉडबैंड अवसंरचना विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी।
रेलटेल का निगमकरण सितम्बर 2000 में किया गया था। प्रारंभ में इसका उद्देश्य भारतीय रेलवे को आधुनिक दूरसंचार सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा अतिरिक्त दूरसंचार क्षमता का वाणिज्यिक उपयोग करना था, परंतु समय के साथ यह भारत की अग्रणी डिजिटल अवसंरचना कंपनियों में विकसित हो चुकी है।
IRCTC (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) – for LDCE
भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (IRCTC)
भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (Indian Railway Catering and Tourism Corporation Limited – IRCTC) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अधीन एक मिनी रत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (Mini Ratna PSU) है। इसका गठन भारतीय रेलवे की खानपान, पर्यटन तथा ऑनलाइन टिकटिंग सेवाओं को व्यावसायिक एवं आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था।
IRCTC का निगमकरण 27 सितम्बर 1999 को कंपनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत किया गया। प्रारम्भ में इसका मुख्य उद्देश्य रेलवे की खानपान एवं पर्यटन गतिविधियों का विकास था, किंतु समय के साथ यह भारतीय रेलवे की डिजिटल सेवाओं का सबसे बड़ा मंच बन गया।
स्थापना की आवश्यकता
भारतीय रेलवे विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, जहाँ प्रतिदिन लाखों यात्री यात्रा करते हैं। यात्रियों को बेहतर खानपान, स्वच्छ पेयजल, ऑनलाइन टिकटिंग तथा पर्यटन सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए एक विशेषज्ञ संगठन की आवश्यकता महसूस की गई।
इसी उद्देश्य से IRCTC की स्थापना की गई ताकि यात्रियों को आधुनिक, सुविधाजनक एवं ग्राहक-केंद्रित सेवाएँ प्रदान की जा सकें।
IRCTC के प्रमुख कार्य
IRCTC भारतीय रेलवे की कई महत्वपूर्ण सेवाओं का संचालन करता है। इनमें मुख्य रूप से रेलवे कैटरिंग, ई-टिकटिंग, पर्यटन, रेल नीर, होटल बुकिंग, बस बुकिंग तथा अन्य डिजिटल सेवाएँ शामिल हैं।
आज IRCTC भारतीय रेलवे की सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली डिजिटल सेवा संस्थाओं में से एक है।
ई-टिकटिंग सेवा
IRCTC की सबसे लोकप्रिय सेवा ऑनलाइन रेलवे टिकट बुकिंग है। वर्ष 2002 में प्रारम्भ की गई ई-टिकटिंग सेवा ने भारतीय रेलवे में टिकट आरक्षण प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया।
वर्तमान में करोड़ों यात्री IRCTC की वेबसाइट एवं मोबाइल एप के माध्यम से टिकट बुक करते हैं। यह भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स एवं ऑनलाइन टिकटिंग प्रणालियों में से एक है।
ई-टिकटिंग प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को निम्न सुविधाएँ प्राप्त होती हैं—
- आरक्षित टिकट बुकिंग
- तत्काल टिकट बुकिंग
- प्रतीक्षा सूची की जानकारी
- PNR स्थिति
- सीट उपलब्धता
- टिकट रद्दीकरण
- रिफंड सुविधा
IRCTC Rail Connect Mobile App
डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत IRCTC ने Rail Connect Mobile App विकसित किया है, जिसके माध्यम से यात्री मोबाइल फोन से टिकट बुकिंग एवं अन्य सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
आज अधिकांश टिकट बुकिंग मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जा रही है।
खानपान सेवाएँ (Catering Services)
भारतीय रेलवे में खानपान सेवाओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी IRCTC को दी गई है। इसका उद्देश्य यात्रियों को स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं उचित मूल्य पर भोजन उपलब्ध कराना है।
IRCTC निम्न माध्यमों से खानपान सेवाएँ प्रदान करता है—
- बेस किचन (Base Kitchen)
- फूड प्लाजा
- फास्ट फूड यूनिट
- जन आहार
- रेल कोच रेस्टोरेंट
- ऑन-बोर्ड कैटरिंग
IRCTC समय-समय पर खाद्य गुणवत्ता की निगरानी तथा निरीक्षण भी करता है।
ई-कैटरिंग सेवा (E-Catering)
यात्रियों को उनकी पसंद का भोजन उनकी सीट या बर्थ पर उपलब्ध कराने के लिए IRCTC ने ई-कैटरिंग सेवा प्रारम्भ की है।
इस सेवा के माध्यम से यात्री—
- वेबसाइट
- मोबाइल एप
- फोन कॉल
के माध्यम से भोजन ऑर्डर कर सकते हैं।
भोजन विभिन्न अधिकृत रेस्तराँ एवं ब्रांडेड फूड चेन से उपलब्ध कराया जाता है।
पर्यटन सेवाएँ
IRCTC भारतीय रेलवे की पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख संचालक है।
यह घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के टूर पैकेज संचालित करता है।
इनमें शामिल हैं—
- भारत गौरव पर्यटन ट्रेनें
- धार्मिक पर्यटन पैकेज
- तीर्थयात्रा विशेष ट्रेनें
- हवाई एवं रेल टूर पैकेज
- होटल बुकिंग सुविधा
- अवकाश (Holiday) पैकेज
महाराजा एक्सप्रेस
महाराजा एक्सप्रेस भारत की सबसे प्रतिष्ठित लक्ज़री ट्रेनों में से एक है।
इसका संचालन IRCTC द्वारा किया जाता है। यह ट्रेन भारतीय संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करती है।
महाराजा एक्सप्रेस को विश्व की सर्वश्रेष्ठ लक्ज़री ट्रेनों में गिना जाता है तथा इसे अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
भारत गौरव ट्रेनें
भारतीय संस्कृति, धार्मिक स्थलों एवं पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के लिए IRCTC भारत गौरव ट्रेनों का संचालन करता है।
इन ट्रेनों के माध्यम से यात्री कम लागत में संगठित पर्यटन पैकेज का लाभ उठा सकते हैं।
रेल नीर (Rail Neer)
रेल नीर IRCTC द्वारा निर्मित पैकेज्ड पेयजल ब्रांड है।
यात्रियों को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से Rail Neer की शुरुआत की गई थी।
आज देश के विभिन्न भागों में स्थापित आधुनिक संयंत्रों में Rail Neer का उत्पादन किया जाता है तथा रेलवे स्टेशनों एवं ट्रेनों में इसकी आपूर्ति की जाती है।
Rail Neer भारतीय रेलवे की सबसे सफल उपभोक्ता सेवाओं में से एक मानी जाती है।
डिजिटल भुगतान एवं अन्य सेवाएँ
IRCTC ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को भी प्रोत्साहित किया है।
यात्री विभिन्न माध्यमों से भुगतान कर सकते हैं—
- UPI
- नेट बैंकिंग
- डेबिट कार्ड
- क्रेडिट कार्ड
- IRCTC eWallet
इसके अतिरिक्त IRCTC होटल बुकिंग, बस टिकट बुकिंग तथा अन्य यात्रा संबंधी सेवाएँ भी प्रदान करता है।
IRCTC की उपलब्धियाँ
IRCTC ने भारतीय रेलवे की सेवाओं के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं—
- विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन रेल टिकटिंग प्रणालियों में स्थान।
- लाखों यात्रियों को प्रतिदिन डिजिटल सेवाएँ।
- ई-कैटरिंग का सफल संचालन।
- Rail Neer ब्रांड की स्थापना।
- पर्यटन एवं लक्ज़री ट्रेन संचालन।
- डिजिटल भुगतान को बढ़ावा।
भारतीय रेलवे में IRCTC का महत्व
IRCTC ने भारतीय रेलवे को पारंपरिक सेवा प्रदाता से आधुनिक डिजिटल सेवा संगठन में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऑनलाइन टिकटिंग, डिजिटल भुगतान, ई-कैटरिंग, पर्यटन एवं Rail Neer जैसी सेवाओं के माध्यम से यह भारतीय रेलवे की ग्राहक सेवा प्रणाली का अभिन्न अंग बन चुका है।
LDCE Group-B परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
IRCTC का निगमकरण 27 सितम्बर 1999 को किया गया था। यह रेल मंत्रालय के अधीन एक Mini Ratna PSU है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। ई-टिकटिंग, खानपान, पर्यटन एवं Rail Neer इसका प्रमुख कार्यक्षेत्र है। महाराजा एक्सप्रेस तथा भारत गौरव पर्यटन ट्रेनों का संचालन IRCTC द्वारा किया जाता है। Rail Connect App एवं e-Catering इसकी प्रमुख डिजिटल सेवाएँ हैं।
भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड (CONCOR) (For LDCE)
भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड (CONCOR)
भारतीय कंटेनर निगम लिमिटेड (Container Corporation of India Limited – CONCOR) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (Public Sector Undertaking – PSU) है। इसका गठन मार्च 1988 में किया गया था और इसका उद्देश्य देश में कंटेनरीकृत माल परिवहन (Containerized Freight Transport) को विकसित करना तथा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स सेवाएँ प्रदान करना था।
आज CONCOR भारत की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनी है, जो रेल, सड़क एवं बंदरगाह आधारित परिवहन को एकीकृत करते हुए घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए व्यापक लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करती है।
इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON International Limited) (For LDCE)
इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON International Limited)
इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON International Limited) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (Central Public Sector Enterprise – CPSE) है। इसकी स्थापना मुख्य रूप से भारतीय रेलवे तथा अन्य अवसंरचना परियोजनाओं के निर्माण एवं विकास के उद्देश्य से की गई थी। प्रारंभ में इसका नाम Indian Railway Construction Company Limited था, जिसे बाद में इसके बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कार्यक्षेत्र को ध्यान में रखते हुए IRCON International Limited नाम दिया गया।
कंपनी का निगमकरण 28 अप्रैल 1976 को किया गया था। वर्तमान में IRCON भारत एवं विदेशों में रेलवे, राजमार्ग, पुल, सुरंग, मेट्रो रेल, भवन निर्माण, विद्युत प्रणालियों तथा अन्य अवसंरचना परियोजनाओं के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
DFCCIL (Dedicated Freight Corridor) | Indian Railways (Hi/ Eng)(For LDCE)
भारतीय समर्पित माल यातायात गलियारा निगम लिमिटेड (DFCCIL)
भारतीय समर्पित माल यातायात गलियारा निगम लिमिटेड (Dedicated Freight Corridor Corporation of India Limited – DFCCIL) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (Public Sector Undertaking – PSU) है, जिसकी स्थापना भारतीय रेलवे के माल परिवहन तंत्र को आधुनिक, दक्ष एवं विश्वस्तरीय बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसका निगमकरण 30 अक्टूबर 2006 को कंपनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत किया गया था। DFCCIL को विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle – SPV) के रूप में स्थापित किया गया, जिसे समर्पित माल यातायात गलियारों (Dedicated Freight Corridors) की योजना बनाने, निर्माण करने, अनुरक्षण करने तथा परिचालन करने का दायित्व सौंपा गया।
भारतीय रेलवे नेटवर्क पर लगातार बढ़ते यात्री एवं माल यातायात के कारण क्षमता संबंधी गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही थीं। अधिकांश मुख्य मार्गों पर लाइन क्षमता का उपयोग 100 प्रतिशत से अधिक हो चुका था, जिसके कारण मालगाड़ियों की औसत गति कम होती जा रही थी तथा वैगनों का टर्न राउंड समय बढ़ रहा था। इन समस्याओं के समाधान हेतु समर्पित माल यातायात गलियारों की अवधारणा विकसित की गई।
