शंटिंग (Shunting)
(General Rules 5.13 से 5.21 के अनुसार)
रेलवे परिचालन में शंटिंग (Shunting) एक ऐसी नियंत्रित परिचालन प्रक्रिया है जिसके माध्यम से इंजन, रेल मोटर, स्वचालित रेल वाहन अथवा कोच एवं वैगनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाकर उन्हें किसी ट्रेन से जोड़ने (Attaching), अलग करने (Detaching), एक लाइन से दूसरी लाइन में स्थानांतरित करने (Transfer), रेक का गठन (Formation) अथवा पुनर्गठन (Re-marshalling) करने तथा अन्य परिचालन कार्य संपन्न किए जाते हैं। किसी भी स्टेशन, यार्ड, साइडिंग अथवा कोचिंग डिपो में होने वाला अधिकांश परिचालन शंटिंग के माध्यम से ही सम्पन्न होता है।
General Rule 5.13 के अनुसार शंटिंग से अभिप्राय किसी इंजन, स्वचालित रेल वाहन अथवा किसी वाहन या वाहनों की ऐसी गति (Movement) से है, जो किसी ट्रेन से जोड़ने, अलग करने, एक लाइन से दूसरी लाइन में स्थानांतरित करने अथवा किसी अन्य परिचालन उद्देश्य की पूर्ति के लिए की जाती है। इस परिभाषा से स्पष्ट है कि शंटिंग केवल वाहनों को इधर-उधर ले जाने की क्रिया नहीं, बल्कि रेलवे परिचालन का एक विधिवत नियंत्रित एवं सुरक्षा-प्रधान संचालन है।
रेलवे में प्रतिदिन हजारों वैगनों एवं कोचों की स्थिति बदली जाती है। किसी मालगाड़ी में गंतव्य के अनुसार वैगनों का क्रम बदलना हो, यात्री गाड़ी में अतिरिक्त कोच जोड़ना हो, इंजन बदलना हो, वाशिंग लाइन अथवा रिपेयर लाइन में रेक भेजनी हो या दोषयुक्त वैगन को अलग करना हो—इन सभी कार्यों का आधार शंटिंग ही है। यदि शंटिंग निर्धारित नियमों के अनुसार न की जाए, तो मुख्य लाइन का संचालन, यार्ड प्रबंधन तथा ट्रेन परिचालन सभी प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि भारतीय रेल ने शंटिंग के प्रत्येक चरण के लिए General Rules, Subsidiary Rules तथा Station Working Rules के माध्यम से विस्तृत व्यवस्था निर्धारित की है।
शंटिंग सदैव सुरक्षा (Safety), नियंत्रण (Control) तथा समन्वय (Coordination) के सिद्धांतों पर आधारित होती है। प्रत्येक शंटिंग मूवमेंट से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित लाइन उपलब्ध है, पॉइंट सही स्थिति में हैं, आवश्यक संकेत अथवा प्राधिकरण प्राप्त है तथा कार्य में सम्मिलित प्रत्येक कर्मचारी अपने दायित्व से पूर्णतः परिचित है। लोको पायलट केवल अधिकृत संकेत अथवा अधिकृत कर्मचारी के निर्देश पर ही इंजन चलाता है। यदि संकेत स्पष्ट न हो अथवा किसी प्रकार का संदेह हो, तो शंटिंग रोक दी जाती है। यह सिद्धांत भारतीय रेल की सुरक्षा संस्कृति का मूल आधार है।
शंटिंग का उद्देश्य
शंटिंग का उद्देश्य केवल किसी वाहन का स्थान परिवर्तन करना नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण रेलवे परिचालन को व्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाए रखना है। किसी भी स्टेशन अथवा यार्ड में आने वाली प्रत्येक रेक अपने अंतिम परिचालन स्वरूप में नहीं होती। उसे आगे भेजने से पूर्व अनेक बार उसका पुनर्गठन करना पड़ता है। इस कार्य को सुरक्षित एवं योजनाबद्ध ढंग से सम्पन्न करने के लिए शंटिंग की जाती है।
माल परिचालन में विभिन्न गंतव्यों के अनुसार वैगनों का वर्गीकरण (Classification), पूर्ण रेक का निर्माण, लोडिंग एवं अनलोडिंग लाइन पर वैगनों को रखना, दोषयुक्त वैगनों को हटाना तथा यार्ड की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना शंटिंग का प्रमुख उद्देश्य है। इसी प्रकार यात्री परिचालन में अतिरिक्त कोच जोड़ना या हटाना, पार्सल अथवा लगेज वैन लगाना, इंजन बदलना, वाशिंग लाइन अथवा कोचिंग डिपो तक रेक पहुँचाना तथा प्लेटफॉर्म परिवर्तन भी शंटिंग के माध्यम से किया जाता है।
मार्शलिंग यार्डों में शंटिंग का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों अथवा हजारों वैगनों को उनके गंतव्य के अनुसार अलग-अलग लाइनों में वर्गीकृत किया जाता है। यदि यह कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार न किया जाए, तो न केवल यार्ड की कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि मुख्य लाइन पर ट्रेनों की समयपालन (Punctuality) भी प्रभावित होगी।
इस प्रकार शंटिंग रेलवे परिचालन की एक आधारभूत प्रक्रिया है, जिसके बिना सुरक्षित, व्यवस्थित एवं समयबद्ध रेल संचालन की कल्पना नहीं की जा सकती।
शंटिंग के मूल सिद्धांत
यद्यपि शंटिंग के अनेक प्रकार हैं तथा विभिन्न परिस्थितियों में उनकी प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है, फिर भी सभी प्रकार की शंटिंग कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित होती है। इन सिद्धांतों का पालन प्रत्येक कर्मचारी के लिए अनिवार्य है।
शंटिंग सदैव अधिकृत कर्मचारी के नियंत्रण में की जाएगी। लोको पायलट किसी भी स्थिति में स्वयं निर्णय लेकर शंटिंग प्रारम्भ नहीं करेगा। प्रत्येक शंटिंग मूवमेंट का स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए तथा संबंधित सभी कर्मचारियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि किस वाहन को किस लाइन पर ले जाना है और किस सीमा तक शंटिंग की जानी है।
शंटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व संबंधित लाइन, पॉइंट तथा सिग्नल की स्थिति की पुष्टि की जाएगी। यदि किसी प्रकार की शंका हो तो पहले स्थिति स्पष्ट की जाएगी, उसके बाद ही शंटिंग प्रारम्भ होगी। शंटिंग के दौरान निर्धारित गति सीमा का पालन किया जाएगा तथा वाहन पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखा जाएगा। जहाँ भी आवश्यक हो, हैंड सिग्नल, शंट सिग्नल अथवा अन्य स्वीकृत संकेतों का उपयोग किया जाएगा।
शंटिंग पूर्ण होने के बाद यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है कि संबंधित वाहन सुरक्षित रूप से खड़े हैं तथा उनके स्वतः गति करने (Run Away) की कोई संभावना नहीं है। आवश्यकता के अनुसार हैंड ब्रेक, स्कॉच ब्लॉक अथवा अन्य स्वीकृत सुरक्षा साधनों का उपयोग किया जाएगा।
इन मूल सिद्धांतों का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक शंटिंग मूवमेंट को दुर्घटनामुक्त, नियंत्रित तथा सुरक्षित बनाना है।
शंटिंग के प्रकार (Types of Shunting)
भारतीय रेल में शंटिंग की विधि का चयन उपलब्ध संसाधनों, यार्ड की संरचना, परिचालन की आवश्यकता, वाहनों की प्रकृति तथा सुरक्षा की दृष्टि से किया जाता है। प्रत्येक प्रकार की शंटिंग का उद्देश्य समान होता है, अर्थात् रेल वाहनों को सुरक्षित रूप से निर्धारित स्थान पर पहुँचाना; किन्तु उनकी कार्यविधि, उपयोग का क्षेत्र तथा सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएँ एक-दूसरे से भिन्न होती हैं।
आधुनिक भारतीय रेल में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसी कारण वर्तमान समय में अधिकांश शंटिंग नियंत्रित (Controlled) विधियों द्वारा की जाती है। कुछ पारंपरिक विधियाँ, जैसे Loose Shunting तथा Fly Shunting, अब केवल सीमित परिस्थितियों में अथवा विशेष नियमों के अधीन ही स्वीकार्य हैं।
सामान्यतः शंटिंग के निम्नलिखित प्रकार माने जाते हैं—
- Hand Shunting (हैंड शंटिंग)
- Loose Shunting (लूज़ शंटिंग)
- Hump Shunting (हंप शंटिंग)
- Fly Shunting (फ्लाई शंटिंग)
- Push and Pull Shunting (पुश एवं पुल शंटिंग)
इन सभी प्रकारों का विस्तृत अध्ययन के लिए लिंक को क्लिक करे ।
General Rules 5.13 से 5.21 : शंटिंग संबंधी सामान्य नियम
भूमिका
शंटिंग का कार्य केवल इंजन चलाने या वैगनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने तक सीमित नहीं है। प्रत्येक शंटिंग मूवमेंट के पीछे स्पष्ट परिचालन योजना, निर्धारित नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था तथा संबंधित कर्मचारियों के बीच समन्वय आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से General Rules में शंटिंग संबंधी मूलभूत नियम निर्धारित किए गए हैं।
इन नियमों का पालन प्रत्येक स्टेशन, यार्ड, साइडिंग तथा अन्य अधिकृत स्थान पर किया जाता है। यद्यपि प्रत्येक जोन अपने Subsidiary Rules (SR) एवं Station Working Rules (SWR) के माध्यम से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त निर्देश जारी कर सकता है, फिर भी मूल सिद्धांत General Rules के अनुसार ही लागू होते हैं।
GR 5.13 – Shunting (शंटिंग)
नियम का उद्देश्य
General Rule 5.13 शंटिंग की मूल अवधारणा को स्पष्ट करता है। यह नियम बताता है कि किन-किन प्रकार की रेल वाहनों की गति को शंटिंग माना जाएगा तथा किन उद्देश्यों के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। यही नियम पूरे अध्याय की आधारशिला है।
नियम का सार
शंटिंग वह नियंत्रित रेल गति (Movement) है जिसमें इंजन, स्वचालित रेल वाहन अथवा किसी वाहन या वाहनों को किसी ट्रेन से जोड़ने, अलग करने, एक लाइन से दूसरी लाइन में स्थानांतरित करने अथवा किसी अन्य परिचालन उद्देश्य से चलाया जाता है।
नियम की व्याख्या
इस नियम का सबसे महत्वपूर्ण शब्द है—"Controlled Movement" अर्थात नियंत्रित गति।
यदि कोई वाहन अनियंत्रित होकर स्वयं चल पड़े, तो उसे शंटिंग नहीं कहा जाएगा। उसी प्रकार यदि कोई ट्रेन सामान्य परिचालन के अंतर्गत एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक चल रही है, तो वह भी शंटिंग नहीं है।
शंटिंग तभी मानी जाएगी जब—
- उद्देश्य परिचालन संबंधी हो।
- मूवमेंट अधिकृत कर्मचारी के नियंत्रण में हो।
- निर्धारित सीमा के भीतर किया जा रहा हो।
- नियमों एवं संकेतों का पालन किया जा रहा हो।
इस प्रकार प्रत्येक शंटिंग एक परिचालन प्रक्रिया है, जबकि प्रत्येक रेल गति (Movement) शंटिंग नहीं होती।
व्यावहारिक उदाहरण
मान लीजिए किसी मालगाड़ी में कुल 42 वैगन हैं। इनमें से 8 वैगन दूसरे गंतव्य के लिए अलग किए जाने हैं। स्टेशन पहुँचने के बाद शंटिंग इंजन उन 8 वैगनों को अलग कर दूसरी लाइन पर ले जाता है। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया शंटिंग कहलाती है।
इसी प्रकार किसी यात्री गाड़ी में अतिरिक्त एसी कोच जोड़ना, इंजन बदलना अथवा वाशिंग लाइन में रेक ले जाना भी शंटिंग के अंतर्गत आता है।
परिचालन महत्व
GR 5.13 यह स्पष्ट करता है कि शंटिंग रेलवे परिचालन का अभिन्न अंग है। यदि इस नियम की परिभाषा स्पष्ट न हो, तो आगे के सभी नियमों को समझना कठिन हो जाएगा। इसलिए विभागीय परीक्षाओं में यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है कि शंटिंग क्या है? अथवा कौन-सा मूवमेंट शंटिंग कहलाएगा?
परीक्षा की दृष्टि से
अक्सर निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं—
- शंटिंग की परिभाषा लिखिए।
- GR 5.13 किस विषय से संबंधित है?
- क्या इंजन परिवर्तन शंटिंग है?
- क्या कोच जोड़ना अथवा हटाना शंटिंग है?
- क्या सामान्य ट्रेन संचालन शंटिंग कहलाता है?
यदि GR 5.13 की अवधारणा स्पष्ट हो, तो इन सभी प्रश्नों का उत्तर आसानी से दिया जा सकता है।
GR 5.14 – Control of Shunting (शंटिंग का नियंत्रण)
नियम का उद्देश्य
General Rule 5.14 का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी शंटिंग मूवमेंट बिना नियंत्रण, बिना अनुमति अथवा बिना समुचित समन्वय के न किया जाए। शंटिंग के दौरान अनेक कर्मचारी एक साथ कार्य करते हैं—स्टेशन मास्टर, यार्ड मास्टर, लोको पायलट, पॉइंट्समैन, गार्ड तथा शंटिंग स्टाफ। यदि इनके बीच स्पष्ट नियंत्रण न हो, तो दुर्घटना की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।
नियम का मूल सिद्धांत
शंटिंग सदैव अधिकृत परिचालन कर्मचारी (Authorised Operating Staff) के नियंत्रण में की जाएगी।
यह नियम केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि रेलवे सुरक्षा का मूल सिद्धांत है।
नियंत्रण किसके द्वारा किया जाता है?
शंटिंग का नियंत्रण स्थान एवं परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।
स्टेशन सीमा के भीतर सामान्यतः स्टेशन मास्टर नियंत्रण करता है।
बड़े यार्डों में यह दायित्व यार्ड मास्टर अथवा शंटिंग मास्टर का होता है।
जहाँ पृथक शंटिंग स्टाफ उपलब्ध न हो, वहाँ संबंधित अधिकृत परिचालन कर्मचारी शंटिंग का संचालन कराता है।
लोको पायलट केवल प्राप्त निर्देशों के अनुसार इंजन चलाता है; वह स्वयं निर्णय लेकर शंटिंग प्रारम्भ नहीं कर सकता।
व्यावहारिक उदाहरण
यदि किसी यार्ड में एक ही समय दो अलग-अलग रेकों की शंटिंग हो रही हो और दोनों का मार्ग एक ही पॉइंट से होकर जाता हो, तो बिना समन्वय के दोनों रेक एक-दूसरे से टकरा सकती हैं।
ऐसी स्थिति से बचने के लिए एक अधिकृत अधिकारी सम्पूर्ण शंटिंग का नियंत्रण अपने हाथ में रखता है तथा उसी के निर्देशानुसार सभी कर्मचारी कार्य करते हैं।
शंटिंग आदेश (Shunting Authority – T/806)
कई स्टेशनों पर शंटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व लोको पायलट को T/806 अथवा स्थानीय नियमों के अनुसार अन्य स्वीकृत प्राधिकरण दिया जाता है।
किन्तु यह समझना आवश्यक है कि T/806 स्वयं General Rule का भाग नहीं है। यह संबंधित Subsidiary Rules एवं Station Working Rules के अनुसार लागू होता है।
भारतीय रेल में जहाँ लागू नियमों के अनुसार आवश्यक हो, वहाँ शंटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व लोको पायलट को T/806 (Shunting Order) जारी किया जाता है। यह एक अधिकृत शंटिंग प्राधिकरण (Shunting Authority) है, जिसके माध्यम से लोको पायलट को यह अधिकार दिया जाता है कि वह निर्धारित सीमा के भीतर, निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए शंटिंग कार्य कर सके।
T/806 में सामान्यतः शंटिंग की सीमा, दिशा, उद्देश्य तथा आवश्यक परिचालन निर्देश अंकित किए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शंटिंग केवल अधिकृत अनुमति के आधार पर ही की जाए तथा सभी संबंधित कर्मचारी शंटिंग की प्रकृति एवं सीमा से पूर्णतः अवगत हों।
हालाँकि, प्रत्येक स्टेशन या यार्ड पर T/806 जारी करना अनिवार्य नहीं होता। जिन बड़े यार्डों अथवा स्टेशनों पर नियमित रूप से निर्धारित शंटिंग क्षेत्र (Defined Shunting Area) के भीतर शंटिंग होती है तथा जहाँ पृथक शंटिंग स्टाफ नियुक्त रहता है, वहाँ संबंधित Station Working Rules (SWR) अथवा स्थानीय परिचालन निर्देशों के अनुसार T/806 जारी करने से छूट हो सकती है।
इसलिए यह समझना आवश्यक है कि T/806 का उपयोग स्थानीय परिचालन व्यवस्था एवं लागू नियमों के अनुसार किया जाता है। रेलवे कर्मचारी को सदैव अपने स्टेशन के Station Working Rules तथा संबंधित रेलवे प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
T/806 का उद्देश्य
शंटिंग कार्य के लिए अधिकृत अनुमति प्रदान करना।
लोको पायलट को शंटिंग की सीमा एवं उद्देश्य स्पष्ट करना।
अनधिकृत शंटिंग मूवमेंट को रोकना।
शंटिंग कार्य में उत्तरदायित्व (Accountability) सुनिश्चित करना।
सुरक्षित एवं नियंत्रित परिचालन बनाए रखना।
ध्यान दें: T/806 एक परिचालन प्राधिकरण (Operating Authority) है। इसका उपयोग कब और किस प्रकार किया जाएगा, यह संबंधित रेलवे के लागू नियमों एवं स्थानीय कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है।
संकेतों का महत्व
शंटिंग के दौरान लोको पायलट—
- शंट सिग्नल,
- हैंड सिग्नल,
- अथवा अधिकृत कर्मचारी के संकेत
के आधार पर ही इंजन चलाता है।
यदि संकेत स्पष्ट न हो तो शंटिंग रोक दी जाती है।
रेलवे का मूल सिद्धांत है—
"When in doubt, stop the movement."
यद्यपि यह वाक्य GR में इसी रूप में नहीं लिखा है, लेकिन रेलवे परिचालन का मूल सुरक्षा सिद्धांत यही है।
परिचालन महत्व
GR 5.14 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—
- कोई भी कर्मचारी अपनी इच्छा से शंटिंग प्रारम्भ न करे।
- प्रत्येक कर्मचारी को अपनी भूमिका ज्ञात हो।
- पॉइंट बदलने, सिग्नल देने एवं इंजन चलाने के बीच पूर्ण समन्वय बना रहे।
- किसी भी प्रकार के विरोधाभासी (Conflicting) मूवमेंट को रोका जा सके।
यही नियम यार्ड सुरक्षा का आधार है।
परीक्षा की दृष्टि से
LDCE एवं अन्य विभागीय परीक्षाओं में निम्न प्रश्न पूछे जा सकते हैं—
- शंटिंग का नियंत्रण किसके द्वारा किया जाता है?
- क्या लोको पायलट स्वयं शंटिंग प्रारम्भ कर सकता है?
- T/806 किस स्थिति में जारी किया जाता है?
- शंटिंग के समय कौन-से संकेतों का पालन किया जाता है?
- GR 5.14 का उद्देश्य क्या है?
GR 5.15 – आने वाली ट्रेन की दिशा में शंटिंग (Shunting in the Face of an Approaching Train)
नियम का उद्देश्य
रेलवे परिचालन में सबसे अधिक संवेदनशील परिस्थितियों में से एक वह होती है जब किसी स्टेशन की ओर एक ट्रेन आ रही हो और उसी समय स्टेशन सीमा के भीतर शंटिंग करने की आवश्यकता उत्पन्न हो जाए। ऐसी स्थिति में यदि शंटिंग बिना उचित नियंत्रण एवं सुरक्षा उपायों के की जाए, तो शंटिंग मूवमेंट और आने वाली ट्रेन के बीच टक्कर (Collision) की संभावना उत्पन्न हो सकती है।
इसी जोखिम को समाप्त करने के लिए General Rule 5.15 में आने वाली ट्रेन (Approaching Train) की दिशा में शंटिंग के संबंध में मूल सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं।
नियम का मूल सिद्धांत
जब किसी ट्रेन के आगमन की संभावना हो अथवा उसके लिए मार्ग निर्धारित किया जा चुका हो, तब शंटिंग इस प्रकार नहीं की जाएगी कि वह आने वाली ट्रेन के सुरक्षित मार्ग में बाधा उत्पन्न करे।
यदि विशेष परिस्थितियों में ऐसी शंटिंग आवश्यक हो, तो उसे केवल लागू General Rules, Subsidiary Rules तथा Station Working Rules के अनुसार ही किया जाएगा।
नियम की व्याख्या
रेलवे स्टेशन पर एक ही समय अनेक परिचालन गतिविधियाँ चलती रहती हैं। एक ओर ट्रेन का आगमन हो सकता है, दूसरी ओर किसी माल रेक का वर्गीकरण या किसी यात्री रेक का प्लेटफॉर्म परिवर्तन चल रहा हो सकता है। ऐसी स्थिति में यदि शंटिंग मूवमेंट मुख्य लाइन (Main Line) अथवा आने वाली ट्रेन के मार्ग को प्रभावित करे, तो दुर्घटना का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इसलिए किसी भी शंटिंग मूवमेंट से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि—
आने वाली ट्रेन का मार्ग पूरी तरह सुरक्षित है।
शंटिंग वाहन उस मार्ग को फाउल (Foul) नहीं करेंगे।
पॉइंट सही स्थिति में हैं।
यदि आवश्यक हो तो शंटिंग पहले पूरी कर ली जाए या ट्रेन को पहले आने दिया जाए।
रेलवे परिचालन में ट्रेन की सुरक्षित आवाजाही को सदैव प्राथमिकता दी जाती है।
स्टेशन मास्टर की भूमिका
ऐसी परिस्थितियों में स्टेशन मास्टर का दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वह यह सुनिश्चित करता है कि शंटिंग और ट्रेन मूवमेंट एक-दूसरे के साथ विरोधाभासी (Conflicting) न हों।
यदि किसी ट्रेन के लिए मार्ग पहले ही निर्धारित किया जा चुका है, तो उस मार्ग की ओर शंटिंग सामान्यतः नहीं कराई जाती, जब तक कि संबंधित नियम इसकी अनुमति न दें और आवश्यक सुरक्षा उपाय न अपना लिए जाएँ।
व्यावहारिक उदाहरण
मान लीजिए किसी स्टेशन पर डाउन दिशा से एक एक्सप्रेस ट्रेन आने वाली है। उसी समय यार्ड से कुछ वैगनों को मुख्य लाइन पार कर दूसरी लाइन में ले जाना है।
यदि शंटिंग समय पर पूरी नहीं होती और वैगन मुख्य लाइन पर रह जाते हैं, तो आने वाली ट्रेन सीधे उनसे टकरा सकती है।
ऐसी दुर्घटना की संभावना को रोकने के लिए या तो शंटिंग पहले पूरी की जाती है अथवा ट्रेन के गुजर जाने के बाद शंटिंग प्रारम्भ की जाती है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में शंटिंग आवश्यक हो, तो वह केवल संबंधित नियमों एवं स्थानीय निर्देशों के अनुसार ही की जाती है।
ढाल (Gradient) वाले स्टेशन पर विशेष सावधानी
जहाँ स्टेशन के बाहर गिरता हुआ ढाल (Falling Gradient) हो, वहाँ जोखिम और बढ़ जाता है। यदि किसी कारणवश शंटिंग वाहन नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो वह आने वाली ट्रेन के मार्ग में पहुँच सकता है।
ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय Subsidiary Rules एवं Station Working Rules अतिरिक्त सुरक्षा उपाय निर्धारित करते हैं, जैसे—
इंजन को ढाल की दिशा में रखना।
लूज़ शंटिंग पर प्रतिबंध।
सीमित दूरी तक ही शंटिंग की अनुमति।
अतिरिक्त हैंड ब्रेक एवं व्हील स्कॉच का उपयोग।
सुरक्षा का आधार
GR 5.15 का मूल उद्देश्य केवल शंटिंग को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि—
मुख्य लाइन सदैव सुरक्षित रहे।
आने वाली ट्रेन का मार्ग कभी बाधित न हो।
शंटिंग और ट्रेन संचालन के बीच उचित समन्वय बना रहे।
किसी भी स्थिति में आमने-सामने की टक्कर या फाउलिंग की संभावना उत्पन्न न हो।
परीक्षा की दृष्टि से
विभागीय परीक्षाओं में सामान्यतः निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं—
Shunting in the Face of an Approaching Train से क्या अभिप्राय है?
ऐसी स्थिति में स्टेशन मास्टर की क्या जिम्मेदारी होती है?
ढाल वाले स्टेशन पर अतिरिक्त सावधानियाँ क्यों आवश्यक होती हैं?
मुख्य लाइन को फाउल करने का क्या अर्थ है?
इन प्रश्नों का उत्तर केवल नियम याद करके नहीं, बल्कि उसकी अवधारणा समझकर ही दिया जा सकता है।
GR 5.16 – एकल लाइन पर शंटिंग (Shunting on Single Line)
नियम का उद्देश्य
एकल लाइन (Single Line) पर दोनों दिशाओं की ट्रेनों का संचालन एक ही लाइन पर होता है। इसलिए स्टेशन सीमा से बाहर शंटिंग करते समय जोखिम दोहरी लाइन की तुलना में अधिक होता है। यदि उचित सुरक्षा व्यवस्था न की जाए, तो विपरीत दिशा से आने वाली ट्रेन और शंटिंग मूवमेंट के बीच गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
General Rule 5.16 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एकल लाइन पर स्टेशन सीमा के बाहर शंटिंग केवल पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही की जाए।
नियम की व्याख्या
जब शंटिंग के लिए स्टेशन सीमा से बाहर ब्लॉक सेक्शन में जाना आवश्यक हो, तब संबंधित ब्लॉक सेक्शन को पहले सुरक्षित किया जाता है। परिस्थिति के अनुसार Block Back अथवा अन्य निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे विपरीत दिशा से कोई ट्रेन उस लाइन में प्रवेश न कर सके।
जहाँ टोकन, टोकनलेस अथवा अन्य ब्लॉक प्रणाली लागू हो, वहाँ संबंधित Subsidiary Rules एवं Station Working Rules के अनुसार आवश्यक कार्यवाही की जाती है।
इस नियम का मूल उद्देश्य यह है कि शंटिंग के दौरान ब्लॉक सेक्शन पर केवल एक ही अधिकृत मूवमेंट रहे और किसी भी प्रकार का विरोधाभासी ट्रेन मूवमेंट संभव न हो।
व्यावहारिक उदाहरण
यदि किसी छोटे स्टेशन पर माल रेक की लंबाई अधिक होने के कारण कुछ वैगनों को Last Stop Signal के आगे ले जाना आवश्यक हो, तो स्टेशन मास्टर पहले यह सुनिश्चित करेगा कि उस दिशा से कोई ट्रेन नहीं आ रही है। आवश्यक ब्लॉक सुरक्षा प्राप्त होने के बाद ही लोको पायलट को शंटिंग की अनुमति दी जाएगी।
कार्य पूर्ण होने पर यह पुष्टि की जाएगी कि सभी वाहन पुनः सुरक्षित सीमा के भीतर आ गए हैं। उसके बाद ही ब्लॉक सेक्शन सामान्य ट्रेन संचालन के लिए उपलब्ध माना जाएगा।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षा में प्रायः निम्न बिंदुओं पर प्रश्न पूछे जाते हैं—
Single Line पर शंटिंग करते समय मुख्य सुरक्षा सिद्धांत क्या है?
Block Back का उद्देश्य क्या है?
ब्लॉक सेक्शन को सुरक्षित करना क्यों आवश्यक है?
स्टेशन सीमा से बाहर शंटिंग कब की जा सकती है?
इन प्रश्नों के उत्तर देते समय केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसका सुरक्षा उद्देश्य भी स्पष्ट करना चाहिए।
GR 5.17 – दोहरी लाइन पर शंटिंग (Shunting on Double Line)
नियम का उद्देश्य
दोहरी लाइन (Double Line) पर प्रत्येक दिशा के लिए अलग-अलग लाइन उपलब्ध होती है, जिससे एकल लाइन की अपेक्षा परिचालन सरल हो जाता है। फिर भी ब्लॉक सेक्शन में शंटिंग अथवा किसी अग्रवर्ती (Preceding) ट्रेन के पीछे शंटिंग करते समय सुरक्षा के विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है।
General Rule 5.17 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शंटिंग के कारण किसी भी नियमित ट्रेन संचालन में बाधा उत्पन्न न हो तथा ब्लॉक सेक्शन में एक समय में केवल अधिकृत एवं सुरक्षित मूवमेंट ही हो।
नियम की व्याख्या
सामान्य परिस्थितियों में ब्लॉक सेक्शन मुख्य लाइन परिचालन के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यदि किसी कारणवश शंटिंग के लिए स्टेशन सीमा से बाहर जाना आवश्यक हो, तो पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित ब्लॉक सेक्शन सुरक्षित है तथा शंटिंग के कारण किसी अन्य ट्रेन का मार्ग प्रभावित नहीं होगा।
यदि किसी ट्रेन के पीछे (Following a Train) शंटिंग की जानी हो, तो केवल निर्धारित नियमों एवं विशेष निर्देशों के अनुसार ही इसकी अनुमति दी जाती है। इस समय स्टेशन मास्टर को यह सुनिश्चित करना होता है कि अग्रवर्ती ट्रेन पर्याप्त दूरी तक आगे निकल चुकी है तथा उसके साथ किसी प्रकार का टकराव संभव नहीं है।
Following Train Shunting
कभी-कभी परिचालन की आवश्यकता के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है कि स्टेशन से एक ट्रेन प्रस्थान कर चुकी होती है तथा उसके पीछे शंटिंग करना आवश्यक हो जाता है।
ऐसी स्थिति में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि ट्रेन स्टेशन छोड़ चुकी है। निम्न बातों का भी मूल्यांकन किया जाता है—
ट्रेन की गति।
ट्रेन का भार।
ब्रेक क्षमता।
सेक्शन का ग्रेडिएंट।
ब्लॉक सेक्शन की स्थिति।
स्थानीय परिचालन निर्देश।
यदि इन सभी बातों का परीक्षण करने के बाद शंटिंग सुरक्षित मानी जाती है, तभी आवश्यक प्राधिकरण जारी किया जाता है।
स्टेशन मास्टर की जिम्मेदारी
ऐसी परिस्थितियों में स्टेशन मास्टर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि—
ब्लॉक सेक्शन सुरक्षित है।
विरोधाभासी ट्रेन मूवमेंट नहीं है।
आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है।
लोको पायलट को स्पष्ट शंटिंग प्राधिकरण दिया गया है।
कार्य पूर्ण होने के बाद ब्लॉक सेक्शन पुनः सामान्य परिचालन के लिए उपलब्ध है।
व्यावहारिक उदाहरण
मान लीजिए किसी मालगाड़ी के प्रस्थान के तुरंत बाद यार्ड से कुछ वैगनों को ब्लॉक सेक्शन में ले जाकर वापस लाना आवश्यक है।
यदि बिना उचित अनुमति के ऐसा किया जाए, तो पीछे चलने वाली दूसरी ट्रेन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इसीलिए रेलवे में प्रत्येक ऐसे मूवमेंट को नियंत्रित एवं अभिलेखित (Documented) किया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
विभागीय परीक्षाओं में निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं—
Following Train Shunting क्या है?
Double Line पर Block Section में शंटिंग कब की जा सकती है?
स्टेशन मास्टर की क्या जिम्मेदारी है?
किन परिस्थितियों का मूल्यांकन आवश्यक होता है?
GR 5.20 – ढाल (Gradient) पर शंटिंग
नियम का उद्देश्य
ढाल (Gradient) पर शंटिंग रेलवे परिचालन के सबसे संवेदनशील कार्यों में से एक है। यदि वाहन किसी कारणवश नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो वह तेज गति से लुढ़कते हुए मुख्य लाइन पर पहुँच सकता है, किसी अन्य रेक से टकरा सकता है अथवा पटरी से उतर सकता है।
इसी जोखिम को ध्यान में रखते हुए General Rule 5.20 में ढाल वाले स्थानों पर शंटिंग के लिए विशेष सुरक्षा सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं।
नियम की व्याख्या
जहाँ स्टेशन से बाहर की ओर गिरता हुआ ढाल (Falling Gradient) हो, वहाँ शंटिंग करते समय यह प्रयास किया जाता है कि इंजन ढाल की दिशा (Falling Side) की ओर रहे। इससे पूरे समय इंजन का नियंत्रण रेक पर बना रहता है और आवश्यकता पड़ने पर वाहन को तुरंत रोका जा सकता है।
यदि किसी व्यावहारिक कारण से इंजन को ढाल की दिशा में रखना संभव न हो, तो संबंधित Subsidiary Rules एवं Station Working Rules के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं।
ढाल पर अतिरिक्त सावधानियाँ
ढाल वाले स्थान पर शंटिंग करते समय सामान्यतः निम्न सुरक्षा सिद्धांत अपनाए जाते हैं—
लूज़ शंटिंग से यथासंभव बचा जाता है।
आवश्यक होने पर रेक को एयर ब्रेक या वैक्यूम ब्रेक के नियंत्रण में रखा जाता है।
अलग किए गए वाहनों को हैंड ब्रेक द्वारा सुरक्षित किया जाता है।
आवश्यकता पड़ने पर व्हील स्कॉच या अन्य स्वीकृत साधनों का उपयोग किया जाता है।
जहाँ तक शंटिंग की अनुमति है, उस सीमा को स्थानीय नियमों के अनुसार स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाता है।
इन उपायों का उद्देश्य किसी भी प्रकार के Run Away Vehicles की संभावना को समाप्त करना है।
व्यावहारिक उदाहरण
मान लीजिए किसी स्टेशन से आगे 1 in 260 का गिरता हुआ ढाल है।
यदि शंटिंग के दौरान अलग किया गया वैगन पर्याप्त रूप से सुरक्षित न किया जाए, तो वह स्वयं गति पकड़कर मुख्य लाइन में पहुँच सकता है। ऐसी स्थिति में सामने से आने वाली ट्रेन के साथ गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
इसी कारण ढाल वाले स्टेशनों के Station Working Rules में अतिरिक्त सावधानियाँ स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाती हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षाओं में निम्न बिंदुओं पर विशेष प्रश्न पूछे जाते हैं—
Gradient पर शंटिंग करते समय इंजन किस दिशा में होना चाहिए?
Run Away Vehicle क्या है?
ढाल पर Loose Shunting क्यों जोखिमपूर्ण है?
अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता क्यों होती है?
GR 5.21 – लूज़ शंटिंग (Loose Shunting)
नियम का उद्देश्य
General Rule 5.21 लूज़ शंटिंग के संबंध में मूल सुरक्षा सिद्धांत निर्धारित करता है। यह नियम इस तथ्य को स्वीकार करता है कि लूज़ शंटिंग में कुछ समय के लिए वाहन इंजन के प्रत्यक्ष नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं। इसलिए इस प्रकार की शंटिंग केवल उन्हीं परिस्थितियों में स्वीकार्य है जहाँ सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
नियम की व्याख्या
लूज़ शंटिंग करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वाहन को इंजन से अलग करने के बाद भी उसका नियंत्रण पूरी तरह समाप्त नहीं होना चाहिए।
शंटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व संबंधित लाइन, पॉइंट, सिग्नल तथा रोकने की व्यवस्था का परीक्षण किया जाता है। यदि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में संदेह हो, तो लूज़ शंटिंग नहीं की जानी चाहिए।
किन परिस्थितियों में विशेष सावधानी आवश्यक है
लूज़ शंटिंग करते समय निम्न परिस्थितियाँ विशेष रूप से जोखिमपूर्ण मानी जाती हैं—
गिरता हुआ ढाल (Falling Gradient)।
कम दृश्यता।
भारी भार वाले वैगन।
खतरनाक माल।
यात्री कोच।
मुख्य लाइन के निकट शंटिंग।
इन परिस्थितियों में स्थानीय नियमों के अनुसार प्रतिबंध अथवा अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाते हैं।
नियम का सुरक्षा सिद्धांत
GR 5.21 का मूल संदेश स्पष्ट है—
जहाँ नियंत्रित शंटिंग (Controlled Shunting) संभव हो, वहाँ अनियंत्रित गति (Free Rolling Movement) पर आधारित शंटिंग से बचा जाना चाहिए।
इसी कारण आधुनिक भारतीय रेल में Push and Pull Shunting को प्राथमिकता दी जाती है तथा Loose Shunting का उपयोग केवल आवश्यक एवं अनुमत परिस्थितियों में ही किया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस नियम से सामान्यतः निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं—
GR 5.21 किस विषय से संबंधित है?
किन परिस्थितियों में Loose Shunting जोखिमपूर्ण होती है?
आधुनिक रेलवे परिचालन में नियंत्रित शंटिंग को प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
कौन-कौन से वाहन Loose Shunting के लिए अनुपयुक्त माने जाते हैं?
अध्याय का सार
General Rules 5.13 से 5.21 का उद्देश्य केवल शंटिंग की प्रक्रिया बताना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक शंटिंग मूवमेंट नियंत्रित (Controlled), समन्वित (Coordinated) तथा सुरक्षित (Safe) हो। चाहे कार्य किसी छोटे स्टेशन पर हो या बड़े मार्शलिंग यार्ड में, सुरक्षा का मूल सिद्धांत एक ही रहता है—शंटिंग का प्रत्येक चरण अधिकृत कर्मचारी के नियंत्रण में, सही सिग्नल, सही पॉइंट तथा निर्धारित नियमों के अनुसार ही सम्पन्न होना चाहिए।
