शंटिंग के दौरान अपनाई जाने वाली सामान्य सावधानियाँ एवं निषिद्ध कार्य
शंटिंग संबंधी अधिकांश दुर्घटनाएँ यांत्रिक दोषों की अपेक्षा मानवीय त्रुटियों के कारण होती हैं। गलत पॉइंट सेट होना, अस्पष्ट सिग्नल, अधिक गति, कर्मचारियों के बीच समन्वय का अभाव अथवा निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करना—ये सभी दुर्घटना के प्रमुख कारण हैं। इसलिए भारतीय रेल में शंटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व, शंटिंग के दौरान तथा शंटिंग पूर्ण होने के बाद प्रत्येक चरण के लिए सुरक्षा संबंधी स्पष्ट निर्देश निर्धारित किए गए हैं।
सुरक्षा का मूल सिद्धांत यह है कि कोई भी शंटिंग मूवमेंट तभी प्रारम्भ किया जाए जब उससे संबंधित प्रत्येक कर्मचारी को अपने कार्य एवं उत्तरदायित्व की पूर्ण जानकारी हो तथा सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कर ली गई हों।
शंटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व सावधानियाँ
शंटिंग प्रारम्भ करने से पहले संबंधित कर्मचारी यह सुनिश्चित करेगा कि जिस लाइन पर शंटिंग की जानी है, वह पूरी तरह उपलब्ध (Clear) है तथा उस पर कोई अवरोध नहीं है। यदि शंटिंग के लिए पॉइंट बदलने की आवश्यकता हो, तो पहले उनकी सही स्थिति की पुष्टि की जाएगी और जहाँ आवश्यक हो, उन्हें सुरक्षित (Locked) किया जाएगा।
लोको पायलट को यह स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि शंटिंग किस लाइन पर, किस सीमा तक तथा किस उद्देश्य से की जानी है। यदि किसी प्रकार का लिखित अथवा मौखिक प्राधिकरण आवश्यक हो, तो वह पहले प्रदान किया जाएगा।
शंटिंग स्टाफ यह सुनिश्चित करेगा कि कपलिंग, ब्रेक, हैंड ब्रेक तथा अन्य आवश्यक उपकरण कार्यशील अवस्था में हैं। यदि किसी वाहन में ऐसा दोष हो जिससे सुरक्षित शंटिंग प्रभावित हो सकती हो, तो पहले उसका निवारण किया जाएगा।
शंटिंग के दौरान सावधानियाँ
शंटिंग के समय लोको पायलट केवल अधिकृत संकेतों के आधार पर ही इंजन चलाएगा। यदि संकेत स्पष्ट दिखाई न दें अथवा किसी निर्देश के संबंध में संदेह उत्पन्न हो, तो शंटिंग रोक दी जाएगी और स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे बढ़ा जाएगा।
शंटिंग के दौरान गति सदैव नियंत्रित रखी जाएगी। उद्देश्य केवल वाहन को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उसे तुरंत रोक सकने की स्थिति बनाए रखना है।
जहाँ वाहन को किसी अन्य वाहन से जोड़ा जाना हो, वहाँ अंतिम कुछ मीटर की दूरी अत्यंत सावधानी से तय की जाएगी ताकि कपलिंग पर अनावश्यक झटका न लगे। विशेष रूप से यात्री कोच, टैंक वैगन तथा संवेदनशील माल वाले वैगनों के साथ यह सावधानी अत्यंत आवश्यक है।
यदि शंटिंग के दौरान किसी कारण से पॉइंट बदलना आवश्यक हो, तो यह कार्य तभी किया जाएगा जब संबंधित वाहन पूर्णतः सुरक्षित स्थिति में हों और संबंधित कर्मचारी को इसकी जानकारी दे दी गई हो।
शंटिंग पूर्ण होने के बाद सावधानियाँ
शंटिंग समाप्त होने के बाद यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी वाहन निर्धारित स्थान पर सुरक्षित खड़े हैं। जहाँ आवश्यकता हो, वहाँ हैंड ब्रेक लगाए जाएँ तथा स्थानीय नियमों के अनुसार व्हील स्कॉच अथवा अन्य सुरक्षा साधनों का उपयोग किया जाए।
यदि किसी लाइन पर वाहन बिना इंजन के छोड़े गए हैं, तो संबंधित कर्मचारी यह पुष्टि करेगा कि उनके स्वतः चलने (Run Away) की कोई संभावना नहीं है।
शंटिंग के बाद यदि मुख्य लाइन अथवा पॉइंट का उपयोग सामान्य ट्रेन संचालन के लिए होना है, तो उन्हें उनकी सामान्य स्थिति में पुनः स्थापित किया जाएगा।
शंटिंग के दौरान पूर्णतः निषिद्ध कार्य
रेलवे सुरक्षा की दृष्टि से कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हें किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाता।
चलती हुई अवस्था में इंजन या वैगनों के बीच जाकर कपलिंग खोलने या जोड़ने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। वाहन पूर्णतः रुकने के बाद ही यह कार्य किया जाना चाहिए।
चलते हुए वाहन के बफर, स्क्रू कपलिंग अथवा अन्य बाहरी भाग पर सवारी करना अत्यंत जोखिमपूर्ण है और पूर्णतः निषिद्ध है।
किसी भी कर्मचारी को चल रहे वाहन के नीचे से नहीं गुजरना चाहिए। इसी प्रकार वैगनों के नीचे बैठना, विश्राम करना अथवा यार्ड में सोना भी गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है।
मरम्मताधीन वाहन पर बिना उचित सुरक्षा व्यवस्था के कार्य नहीं किया जाना चाहिए। यदि वाहन पर कार्य चल रहा हो, तो उसे संबंधित नियमों के अनुसार संरक्षित (Protected) किया जाना आवश्यक है।
बिना अनुमति किसी कर्मचारी द्वारा स्वयं पॉइंट बदलना अथवा शंटिंग की दिशा परिवर्तित करना भी अत्यंत गंभीर परिचालन त्रुटि मानी जाती है।
शंटिंग के दौरान प्रभावी संचार का महत्व
सुरक्षित शंटिंग का आधार स्पष्ट संचार है। प्रत्येक कर्मचारी को यह ज्ञात होना चाहिए कि किस वाहन को किस लाइन पर ले जाना है, संकेत कौन देगा तथा शंटिंग कहाँ समाप्त होगी।
जहाँ वॉकी-टॉकी अथवा अन्य स्वीकृत संचार साधन उपलब्ध हों, उनका उपयोग किया जाना चाहिए। अन्य परिस्थितियों में हैंड सिग्नल, सीटी अथवा स्थानीय नियमों द्वारा निर्धारित संकेतों का उपयोग किया जाता है।
यदि किसी निर्देश को लेकर भ्रम उत्पन्न हो जाए, तो अनुमान के आधार पर कार्य नहीं किया जाएगा। पहले निर्देश स्पष्ट किए जाएँगे, उसके बाद ही शंटिंग आगे बढ़ेगी।
सुरक्षित शंटिंग के पाँच मूल सिद्धांत
सुरक्षित शंटिंग की सम्पूर्ण अवधारणा पाँच मूल सिद्धांतों पर आधारित है—
प्रत्येक शंटिंग अधिकृत कर्मचारी के नियंत्रण में हो।
संबंधित लाइन, पॉइंट एवं सिग्नल की पूर्व पुष्टि की जाए।
निर्धारित गति सीमा का पालन किया जाए।
प्रत्येक कर्मचारी के बीच स्पष्ट समन्वय एवं संचार बना रहे।
शंटिंग पूर्ण होने के बाद वाहन एवं लाइन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इन पाँच सिद्धांतों का पालन करने से अधिकांश शंटिंग दुर्घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।
परीक्षा की दृष्टि से
विभागीय परीक्षाओं में इस अध्याय से प्रायः निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं—
शंटिंग प्रारम्भ करने से पूर्व कौन-कौन सी जाँच आवश्यक है?
शंटिंग के दौरान किन कार्यों पर प्रतिबंध है?
वाहन को सुरक्षित (Secure) करने का क्या महत्व है?
शंटिंग के दौरान प्रभावी संचार क्यों आवश्यक है?
सुरक्षित शंटिंग के मूल सिद्धांत क्या हैं?
इन प्रश्नों के उत्तर केवल नियमों की सूची लिखकर नहीं, बल्कि उनके सुरक्षा उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए देने चाहिए।

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