शंटिंग के दौरान दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण एवं उनकी रोकथाम
भारतीय रेल में शंटिंग के दौरान होने वाली अधिकांश दुर्घटनाएँ किसी एक बड़ी तकनीकी विफलता के कारण नहीं, बल्कि अनेक छोटी-छोटी परिचालन त्रुटियों के संयुक्त परिणामस्वरूप होती हैं। दुर्घटना जाँच रिपोर्टों से यह स्पष्ट होता है कि अधिकांश मामलों में नियमों का पालन नहीं किया गया, समुचित समन्वय नहीं था, अथवा सुरक्षा संबंधी सावधानियों की उपेक्षा की गई।
इसलिए प्रत्येक रेलवे कर्मचारी के लिए यह समझना आवश्यक है कि दुर्घटना केवल नियमों के उल्लंघन से नहीं होती, बल्कि नियमों की उपेक्षा करने की मानसिकता से होती है।
शंटिंग दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण
1. गलत पॉइंट सेट होना
शंटिंग दुर्घटनाओं का सबसे सामान्य कारण पॉइंट का गलत दिशा में सेट होना है। यदि वाहन को जिस लाइन पर जाना है, पॉइंट उसके अनुरूप सेट न हो, तो वाहन गलत लाइन में प्रवेश कर सकता है, दूसरी रेक से टकरा सकता है अथवा पटरी से उतर सकता है।
इसी कारण प्रत्येक शंटिंग मूवमेंट से पहले संबंधित पॉइंट की स्थिति की पुष्टि करना अनिवार्य माना गया है।
2. संकेत (Signal) की गलत व्याख्या
यदि लोको पायलट, पॉइंट्समैन अथवा शंटिंग स्टाफ के बीच संकेतों की सही समझ न हो, तो भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कई दुर्घटनाओं में पाया गया कि एक कर्मचारी ने "आगे बढ़ने" का संकेत समझा, जबकि दूसरा कर्मचारी वाहन रोकना चाहता था। ऐसे विरोधाभासी संकेत गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
इसलिए केवल स्पष्ट एवं अधिकृत संकेतों का ही पालन किया जाना चाहिए।
3. निर्धारित गति से अधिक गति
शंटिंग का उद्देश्य गति नहीं बल्कि नियंत्रण है।
यदि वाहन निर्धारित गति से अधिक वेग से चलाया जाता है, तो—
समय पर ब्रेक लगाना कठिन हो जाता है।
कपलिंग पर अत्यधिक झटका लगता है।
वाहन पटरी से उतर सकता है।
दूसरे वैगनों से टक्कर की संभावना बढ़ जाती है।
यही कारण है कि शंटिंग में गति सदैव नियंत्रित रखी जाती है।
4. कर्मचारियों के बीच समन्वय का अभाव
शंटिंग एक व्यक्ति का कार्य नहीं है। इसमें स्टेशन मास्टर, यार्ड मास्टर, लोको पायलट, गार्ड, पॉइंट्समैन तथा शंटिंग स्टाफ सभी की भूमिका होती है।
यदि इनमें से किसी एक कर्मचारी को भी कार्य की सही जानकारी न हो, तो पूरी शंटिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
समन्वय की कमी विशेष रूप से निम्न परिस्थितियों में अधिक जोखिम उत्पन्न करती है—
एक साथ दो दिशाओं से शंटिंग।
बार-बार पॉइंट परिवर्तन।
कम दृश्यता।
बड़े मार्शलिंग यार्ड।
5. वाहन को सुरक्षित न करना
शंटिंग पूर्ण होने के बाद यदि वाहन को हैंड ब्रेक, स्कॉच अथवा अन्य स्वीकृत साधनों से सुरक्षित नहीं किया गया, तो वह स्वतः चल सकता है।
ऐसे Run Away Vehicle अनेक गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बने हैं। विशेष रूप से ढाल वाले स्टेशनों पर यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।
6. नियमों की अनदेखी
अनुभव के आधार पर अनुमान लगाकर कार्य करना रेलवे परिचालन में स्वीकार्य नहीं है।
यदि कर्मचारी यह सोचकर नियमों की उपेक्षा करे कि "ऐसा तो पहले भी होता रहा है", तो यही सोच दुर्घटना का कारण बन सकती है।
रेलवे परिचालन में प्रत्येक कार्य नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
दुर्घटना रोकने के प्रभावी उपाय
दुर्घटना की रोकथाम केवल नियम याद रखने से नहीं होती; उनका व्यवहार में पालन करना आवश्यक है।
सुरक्षित शंटिंग के लिए निम्न सिद्धांत सदैव अपनाए जाने चाहिए—
शंटिंग प्रारम्भ करने से पहले संबंधित लाइन, पॉइंट एवं सिग्नल की जाँच की जाए।
सभी कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएँ।
लोको पायलट केवल अधिकृत संकेत पर ही इंजन चलाए।
निर्धारित गति सीमा का पालन किया जाए।
वाहनों को जोड़ते एवं अलग करते समय विशेष सावधानी रखी जाए।
शंटिंग समाप्त होने के बाद सभी वाहनों को सुरक्षित किया जाए।
यदि किसी कर्मचारी को संदेह हो, तो पहले स्थिति स्पष्ट की जाए और उसके बाद ही शंटिंग आगे बढ़ाई जाए।
अच्छे शंटिंग कर्मचारी की विशेषताएँ
एक दक्ष शंटिंग कर्मचारी केवल नियमों का जानकार ही नहीं होता, बल्कि वह परिस्थिति का सही आकलन भी करता है।
उसमें निम्न गुण होने चाहिए—
सतर्कता।
धैर्य।
स्पष्ट संचार।
नियमों का ज्ञान।
टीमवर्क की भावना।
सुरक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण।
रेलवे में अनुभव महत्वपूर्ण है, किन्तु अनुभव कभी भी नियमों का स्थान नहीं ले सकता।
विभागीय परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
इस पूरे अध्याय का अध्ययन करते समय निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए—
GR 5.13 से 5.21 का क्रम।
प्रत्येक नियम का उद्देश्य।
शंटिंग के प्रकार एवं उनके उपयोग।
Push & Pull Shunting को सबसे सुरक्षित क्यों माना जाता है।
Loose Shunting पर प्रतिबंध का कारण।
Gradient पर शंटिंग की अतिरिक्त सावधानियाँ।
Block Section में शंटिंग की प्रक्रिया।
शंटिंग के दौरान निषिद्ध कार्य।
दुर्घटना रोकने के प्रमुख उपाय।
यदि इन बिंदुओं की अवधारणा स्पष्ट हो जाए, तो विभागीय परीक्षा के अधिकांश वर्णनात्मक (Descriptive) एवं वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रश्नों का उत्तर सरलता से दिया जा सकता है।
शंटिंग भारतीय रेल के परिचालन तंत्र की आधारभूत प्रक्रिया है। किसी भी ट्रेन का गठन, पुनर्गठन, कोच अथवा वैगन का स्थानांतरण, इंजन परिवर्तन तथा यार्ड संचालन शंटिंग के बिना संभव नहीं है। यही कारण है कि General Rules 5.13 से 5.21 में शंटिंग के प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं।
सुरक्षित शंटिंग केवल नियमों का पालन करने का विषय नहीं, बल्कि परिचालन संस्कृति (Operating Culture) का भाग है। प्रत्येक कर्मचारी का दायित्व है कि वह अधिकृत निर्देशों, सही संकेतों, निर्धारित गति तथा समुचित समन्वय के साथ कार्य करे। यही सुरक्षित, समयबद्ध एवं दुर्घटनामुक्त रेल संचालन की आधारशिला है।

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