3. हंप शंटिंग (Hump Shunting)
हंप शंटिंग (Hump Shunting) बड़े मार्शलिंग यार्डों (Marshalling Yards) में अपनाई जाने वाली एक विशेष शंटिंग प्रणाली है, जिसमें वैगनों को कृत्रिम रूप से निर्मित ऊँचे भाग (Hump) तक इंजन द्वारा ले जाया जाता है। निर्धारित स्थान पर पहुँचने के बाद वैगनों को इंजन से अलग कर दिया जाता है तथा वे गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के प्रभाव से स्वयं नीचे की ओर लुढ़कते हुए पूर्व निर्धारित लाइनों में पहुँच जाते हैं।
इस प्रणाली का उद्देश्य बड़ी संख्या में वैगनों का कम समय में वर्गीकरण (Classification) करना है। जहाँ सामान्य शंटिंग द्वारा प्रत्येक लाइन में अलग-अलग वैगन पहुँचाने में अधिक समय लगता है, वहीं हंप शंटिंग द्वारा एक ही इंजन की सहायता से अनेक लाइनों में वैगनों का वर्गीकरण अत्यंत शीघ्रता से किया जा सकता है।
भारतीय रेल के कुछ बड़े मार्शलिंग यार्डों में इस प्रकार की व्यवस्था विकसित की गई है, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों अथवा हजारों वैगनों का वर्गीकरण किया जाता है।
हंप (Hump) क्या है?
हंप एक कृत्रिम रूप से निर्मित ऊँचा रेलमार्ग (Artificial Gradient) होता है। इसका निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि इंजन द्वारा वैगनों को शीर्ष (Summit) तक ले जाने के बाद वे गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से स्वतः नीचे उतर सकें।
हंप के नीचे अनेक वर्गीकरण लाइनें (Classification Lines) होती हैं। संबंधित पॉइंट्स पहले से निर्धारित कर दिए जाते हैं ताकि प्रत्येक वैगन अपने गंतव्य के अनुसार सही लाइन में पहुँच सके।
आधुनिक हंप यार्डों में वैगनों की गति नियंत्रित करने के लिए Retarder, Automatic Point Operation, Track Circuits तथा अन्य स्वचालित प्रणालियों का भी उपयोग किया जाता है।
हंप शंटिंग की प्रक्रिया
हंप शंटिंग प्रारम्भ होने से पहले यार्ड नियंत्रण द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि कौन-से वैगन किस वर्गीकरण लाइन में भेजे जाएँगे। इसके अनुसार पॉइंट्स की योजना तैयार की जाती है।
इसके बाद शंटिंग इंजन वैगनों को धीरे-धीरे हंप के शीर्ष तक ले जाता है। निर्धारित स्थान पर पहुँचने के पश्चात् आवश्यक वैगन अथवा वैगनों के समूह को इंजन से अलग कर दिया जाता है। इंजन पीछे हट जाता है जबकि वैगन गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की ओर चलने लगते हैं।
नीचे उतरते समय संबंधित पॉइंट्स के माध्यम से प्रत्येक वैगन को उसकी निर्धारित लाइन की ओर भेजा जाता है। यदि यार्ड में रिटार्डर उपलब्ध हों, तो वे वैगनों की गति को नियंत्रित करते हैं ताकि वे अत्यधिक वेग से अन्य वैगनों से न टकराएँ।
निर्धारित लाइन पर पहुँचने के बाद वैगन को आवश्यकता अनुसार सुरक्षित किया जाता है अथवा आगे की रेक निर्माण प्रक्रिया में सम्मिलित कर लिया जाता है।
हंप शंटिंग की विशेषताएँ
हंप शंटिंग पूर्णतः योजनाबद्ध प्रणाली है। इसमें वैगनों की दिशा पहले से निर्धारित होती है तथा प्रत्येक लाइन का उपयोग निश्चित उद्देश्य के लिए किया जाता है। बड़े यार्डों में इस प्रणाली से परिचालन क्षमता (Yard Throughput) में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
यह प्रणाली विशेष रूप से माल परिचालन (Freight Operation) के लिए विकसित की गई है। सामान्य स्टेशन अथवा छोटे यार्डों में इसका उपयोग नहीं किया जाता।
हंप शंटिंग के लाभ
हंप शंटिंग द्वारा बहुत कम समय में बड़ी संख्या में वैगनों का वर्गीकरण किया जा सकता है। इंजन का उपयोग सीमित दूरी तक ही करना पड़ता है, जिससे परिचालन समय एवं ईंधन की बचत होती है। बड़े यार्डों में यह प्रणाली कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देती है तथा रेक निर्माण की प्रक्रिया को तीव्र बनाती है।
हंप शंटिंग की सीमाएँ
हंप शंटिंग के लिए विशेष प्रकार के यार्ड, कृत्रिम ढाल, स्वचालित पॉइंट तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इसका निर्माण एवं रखरखाव सामान्य यार्ड की तुलना में अधिक खर्चीला होता है। इसके अतिरिक्त सभी प्रकार के वैगनों को हंप शंटिंग द्वारा नहीं भेजा जा सकता। खतरनाक माल, कुछ विशेष टैंक वैगन तथा संवेदनशील रेक के लिए स्थानीय नियमों के अनुसार प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।

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