4. फ्लाई शंटिंग (Fly Shunting)
फ्लाई शंटिंग (Fly Shunting) शंटिंग की ऐसी विधि है जिसमें इंजन द्वारा वैगनों को गति प्रदान करने के बाद, चलती हुई अवस्था (In Motion) में कपलिंग खोली जाती है और उसी समय संबंधित पॉइंट बदलकर वैगनों को दूसरी लाइन में भेज दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में इंजन और वैगन दोनों अलग-अलग दिशा में अपनी गति जारी रखते हैं। इंजन आगे निकल जाता है जबकि वैगन अपनी संचित गति के कारण दूसरी लाइन की ओर बढ़ते रहते हैं।
यह शंटिंग अत्यंत जोखिमपूर्ण मानी जाती है क्योंकि पूरी प्रक्रिया कुछ ही क्षणों में सम्पन्न होती है। यदि पॉइंट समय पर न बदले जाएँ, गति अधिक हो अथवा कपलिंग निर्धारित समय पर न खोली जाए, तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
फ्लाई शंटिंग की प्रक्रिया
सबसे पहले इंजन वैगनों को निर्धारित गति प्रदान करता है। जैसे ही आवश्यक गति प्राप्त हो जाती है, चलती अवस्था में कपलिंग खोली जाती है। इंजन अपनी दिशा में आगे बढ़ जाता है जबकि वैगन जड़त्व (Momentum) के कारण आगे बढ़ते रहते हैं।
उसी समय संबंधित पॉइंट्स बदलकर वैगनों को इच्छित लाइन की ओर मोड़ दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया में लोको पायलट, पॉइंट्समैन तथा शंटिंग स्टाफ के बीच अत्यंत सटीक समन्वय आवश्यक होता है।
भारतीय रेल में फ्लाई शंटिंग की स्थिति
फ्लाई शंटिंग सुरक्षा की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील मानी जाती है। इसी कारण भारतीय रेल में इसे सामान्य कार्यप्रणाली के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। अधिकांश रेल जोनों में यह प्रतिबंधित (Prohibited) है तथा केवल जहाँ संबंधित Subsidiary Rules अथवा विशेष स्थानीय निर्देश इसकी अनुमति देते हैं, वहीं सीमित परिस्थितियों में इसे अपनाया जा सकता है।
अतः किसी भी कर्मचारी को यह मानकर कार्य नहीं करना चाहिए कि फ्लाई शंटिंग सामान्य रूप से अनुमत है। सदैव संबंधित जोन के Subsidiary Rules एवं Station Working Rules का पालन करना आवश्यक है।
फ्लाई शंटिंग क्यों जोखिमपूर्ण है?
फ्लाई शंटिंग के दौरान इंजन का प्रत्यक्ष नियंत्रण समाप्त हो जाता है तथा वाहन केवल अपनी गति के आधार पर आगे बढ़ते हैं। यदि गति अधिक हो जाए, पॉइंट सही समय पर न बदले जाएँ अथवा वाहन निर्धारित लाइन में न जाएँ, तो टक्कर अथवा पटरी से उतरने की संभावना उत्पन्न हो सकती है।
इसी कारण आधुनिक रेलवे परिचालन में इस विधि का उपयोग अत्यंत सीमित कर दिया गया है तथा जहाँ संभव हो, नियंत्रित Push and Pull Shunting को प्राथमिकता दी जाती है।
हंप शंटिंग एवं फ्लाई शंटिंग में अंतर
यद्यपि दोनों विधियों में इंजन से अलग होने के बाद वाहन स्वयं आगे बढ़ते हैं, फिर भी दोनों की मूल कार्यप्रणाली भिन्न है।
हंप शंटिंग में वाहन गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण आगे बढ़ते हैं, जबकि फ्लाई शंटिंग में वाहन इंजन द्वारा दी गई गति (Momentum) के कारण आगे बढ़ते हैं।
हंप शंटिंग विशेष रूप से निर्मित मार्शलिंग यार्ड में की जाती है, जबकि फ्लाई शंटिंग किसी भी उपयुक्त लाइन पर की जा सकती थी, यदि नियम इसकी अनुमति दें।
हंप शंटिंग एक योजनाबद्ध एवं नियंत्रित प्रणाली है, जबकि फ्लाई शंटिंग में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है। इसी कारण आधुनिक रेलवे परिचालन में हंप शंटिंग का उपयोग जहाँ आवश्यक हो वहाँ किया जाता है, जबकि फ्लाई शंटिंग पर अधिकांश स्थानों पर प्रतिबंध है।

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