भारतीय रेल में शंटिंग प्रतिबंध (Shunting Restrictions) | किन परिस्थितियों में शंटिंग प्रतिबंधित है?
भारतीय रेल में शंटिंग (Shunting) एक नियमित लेकिन अत्यंत संवेदनशील परिचालन कार्य है। यद्यपि शंटिंग के माध्यम से वैगनों एवं कोचों का गठन, पुनर्गठन तथा स्थानांतरण किया जाता है, फिर भी प्रत्येक प्रकार की शंटिंग हर परिस्थिति में अनुमत नहीं होती। सुरक्षा, परिचालन की आवश्यकता तथा मानव जीवन की रक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेल ने शंटिंग पर अनेक प्रतिबंध निर्धारित किए हैं।
इन प्रतिबंधों का उद्देश्य शंटिंग को रोकना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित, नियंत्रित एवं दुर्घटनामुक्त बनाना है। प्रत्येक लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, यार्ड मास्टर, गार्ड, पॉइंट्समैन तथा शंटिंग स्टाफ के लिए इन प्रतिबंधों की जानकारी अत्यंत आवश्यक है।
शंटिंग प्रतिबंध क्यों आवश्यक हैं?
शंटिंग के दौरान एक छोटी-सी त्रुटि भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। यदि गलत प्रकार के वैगन पर लूज़ शंटिंग कर दी जाए, ढाल (Gradient) पर वाहन को सुरक्षित न किया जाए अथवा बिना अनुमति ब्लॉक सेक्शन में शंटिंग कर दी जाए, तो टक्कर (Collision), पटरी से उतरना (Derailment) या Run Away Vehicle जैसी घटनाएँ हो सकती हैं।
इसीलिए भारतीय रेल में कुछ परिस्थितियों में शंटिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि कुछ परिस्थितियों में अतिरिक्त सावधानियों के साथ ही इसकी अनुमति दी जाती है।
1. हैंड शंटिंग पर प्रतिबंध
हैंड शंटिंग केवल उन्हीं स्थानों पर की जानी चाहिए जहाँ वाहन पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखना संभव हो।
निम्न परिस्थितियों में हैंड शंटिंग नहीं की जानी चाहिए—
जहाँ ढाल (Gradient) अधिक हो।
जहाँ वाहन के अनियंत्रित होने की संभावना हो।
भारी वैगनों या लंबी रेक के साथ।
बिना अधिकृत परिचालन कर्मचारी के पर्यवेक्षण के।
जहाँ स्थानीय नियम इसकी अनुमति न देते हों।
2. लूज़ शंटिंग पर प्रतिबंध
लूज़ शंटिंग सबसे अधिक प्रतिबंधित शंटिंग विधियों में से एक है। निम्न प्रकार के वाहनों पर सामान्यतः लूज़ शंटिंग नहीं की जाती—
यात्री कोच।
जीवित पशुओं से लदे वैगन।
सभी प्रकार के टैंक वैगन।
विस्फोटक या ज्वलनशील पदार्थों से लदे वैगन।
खतरनाक माल (Dangerous Goods) वाले वैगन।
भारी मशीनरी वाले वैगन।
ओवर डाइमेंशनल कंसाइनमेंट (ODC) वाले वैगन।
रेलवे क्रेन।
क्षतिग्रस्त (Damaged) वाहन।
वे सभी वाहन जिन पर "Not to be Loose Shunted" अंकित हो।
इन वाहनों पर लूज़ शंटिंग प्रतिबंधित होने का कारण यह है कि हल्का-सा झटका भी गंभीर दुर्घटना या माल की क्षति का कारण बन सकता है।
3. फ्लाई शंटिंग पर प्रतिबंध
फ्लाई शंटिंग (Fly Shunting) सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत जोखिमपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसमें चलती हुई अवस्था में वाहन इंजन से अलग किए जाते हैं।
इसी कारण अधिकांश रेलवे प्रशासन में यह सामान्य परिचालन विधि नहीं है। जहाँ विशेष स्थानीय निर्देशों द्वारा अनुमति न हो, वहाँ फ्लाई शंटिंग नहीं की जानी चाहिए।
4. ढाल (Gradient) पर शंटिंग संबंधी प्रतिबंध
जहाँ स्टेशन से बाहर गिरता हुआ ढाल (Falling Gradient) हो, वहाँ विशेष सावधानियाँ आवश्यक होती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में सामान्यतः—
लूज़ शंटिंग से बचा जाता है।
वाहन को बिना सुरक्षा के नहीं छोड़ा जाता।
आवश्यकता अनुसार हैंड ब्रेक लगाए जाते हैं।
व्हील स्कॉच (Scotch Block) का उपयोग किया जाता है।
जहाँ संभव हो, इंजन को ढाल की दिशा में रखा जाता है।
इनका उद्देश्य वाहन को अनियंत्रित होकर मुख्य लाइन पर जाने से रोकना है।
5. ब्लॉक सेक्शन में शंटिंग पर प्रतिबंध
ब्लॉक सेक्शन में शंटिंग सामान्य शंटिंग की तरह नहीं की जा सकती।
निम्न परिस्थितियों में शंटिंग नहीं की जानी चाहिए—
बिना अधिकृत अनुमति।
बिना ब्लॉक सुरक्षा सुनिश्चित किए।
जब विरोधाभासी ट्रेन मूवमेंट की संभावना हो।
जब निर्धारित परिचालन प्रक्रिया पूरी न की गई हो।
6. मुख्य लाइन (Main Line) पर शंटिंग संबंधी प्रतिबंध
मुख्य लाइन पर शंटिंग करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि शंटिंग के कारण किसी ट्रेन का सुरक्षित मार्ग प्रभावित न हो।
विशेष रूप से—
आने वाली ट्रेन के मार्ग को फाउल नहीं किया जाना चाहिए।
बिना अनुमति मुख्य लाइन पर वाहन नहीं छोड़े जाने चाहिए।
मुख्य लाइन पर अनावश्यक रुकावट उत्पन्न नहीं की जानी चाहिए।
7. यात्री गाड़ियों के साथ शंटिंग संबंधी प्रतिबंध
यात्री सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए—
यात्रियों से भरे कोचों के साथ अनावश्यक झटका नहीं दिया जाना चाहिए।
इंजन को अधिक गति से कोच से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
बिना आवश्यक सावधानी के कोचों का स्थानांतरण नहीं किया जाना चाहिए।
ब्रेक प्रणाली की जाँच किए बिना शंटिंग नहीं की जानी चाहिए।
8. शंटिंग के दौरान पूर्णतः निषिद्ध कार्य
निम्न कार्य रेलवे सुरक्षा नियमों के विरुद्ध हैं—
चलती हुई गाड़ी में कपलिंग खोलना या जोड़ना।
चलती गाड़ी के बफर या कपलिंग पर सवारी करना।
इंजन रुकने से पहले दो वाहनों के बीच जाना।
चलती गाड़ी के नीचे से गुजरना।
वैगनों के नीचे बैठना या विश्राम करना।
यार्ड में सोना।
बिना सुरक्षा व्यवस्था के मरम्मताधीन वाहन पर कार्य करना।
बिना अनुमति पॉइंट बदलना।
बिना निर्देश शंटिंग की दिशा बदलना।
9. कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ
दुर्घटनाओं के विश्लेषण से यह पाया गया है कि अधिकांश घटनाएँ निम्न कारणों से होती हैं—
जल्दबाजी में कार्य करना।
संकेतों को सही प्रकार से न समझना।
पॉइंट की पुष्टि किए बिना शंटिंग प्रारम्भ करना।
निर्धारित गति से अधिक गति रखना।
वाहन को सुरक्षित किए बिना छोड़ देना।
नियमों के स्थान पर अनुमान के आधार पर कार्य करना।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न
शंटिंग प्रतिबंध क्यों लगाए जाते हैं?
किन वाहनों पर लूज़ शंटिंग प्रतिबंधित है?
ढाल वाले स्टेशन पर कौन-कौन सी अतिरिक्त सावधानियाँ अपनाई जाती हैं?
फ्लाई शंटिंग क्यों जोखिमपूर्ण मानी जाती है?
शंटिंग के दौरान कौन-कौन से कार्य पूर्णतः निषिद्ध हैं?
मुख्य लाइन पर शंटिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
भारतीय रेल में शंटिंग प्रतिबंधों का उद्देश्य परिचालन को कठिन बनाना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित बनाना है। प्रत्येक प्रतिबंध वर्षों के परिचालन अनुभव, दुर्घटना विश्लेषण तथा सुरक्षा सिद्धांतों पर आधारित है। इसलिए प्रत्येक रेलवे कर्मचारी को केवल यह नहीं जानना चाहिए कि कौन-सा कार्य प्रतिबंधित है, बल्कि यह भी समझना चाहिए कि वह प्रतिबंध क्यों लगाया गया है।
नियमों का पालन, स्पष्ट संचार, नियंत्रित गति तथा सतर्कता—यही सुरक्षित एवं दुर्घटनामुक्त शंटिंग की सबसे बड़ी कुंजी है.

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