5. पुश एवं पुल शंटिंग (Push and Pull Shunting)
पुश एवं पुल शंटिंग (Push and Pull Shunting) वह शंटिंग विधि है जिसमें इंजन पूरे समय वैगनों अथवा कोचों से जुड़ा (Coupled) रहता है तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें धक्का देकर (Push) अथवा खींचकर (Pull) निर्धारित लाइन तक ले जाता है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया के दौरान वाहनों पर इंजन का पूर्ण नियंत्रण बना रहता है। यही कारण है कि वर्तमान भारतीय रेल में इसे सबसे सुरक्षित एवं मानक (Standard) शंटिंग प्रणाली माना जाता है।
आधुनिक रेलवे परिचालन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए जहाँ भी संभव हो, शंटिंग इसी विधि से की जाती है। अधिकांश स्टेशन, यार्ड, कोचिंग डिपो, माल यार्ड एवं साइडिंग में नियमित रूप से यही प्रणाली अपनाई जाती है।
पुश एवं पुल शंटिंग का सिद्धांत
इस प्रणाली का मूल सिद्धांत Continuous Control (सतत नियंत्रण) है। शंटिंग के प्रारम्भ से लेकर समाप्ति तक इंजन और वाहन एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। परिणामस्वरूप लोको पायलट आवश्यकता अनुसार किसी भी समय गति बढ़ा सकता है, घटा सकता है अथवा वाहन को तुरंत रोक सकता है।
अन्य शंटिंग विधियों की तुलना में इस प्रणाली में वाहन कभी भी इंजन के नियंत्रण से बाहर नहीं होते। इसी कारण टक्कर, पटरी से उतरने अथवा अनियंत्रित गति (Run Away) की संभावना न्यूनतम रहती है।
पुश एवं पुल शंटिंग की प्रक्रिया
शंटिंग प्रारम्भ करने से पहले संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करता है कि जिस लाइन पर शंटिंग की जानी है, वह उपलब्ध है तथा सभी पॉइंट सही स्थिति में हैं। आवश्यक होने पर शंटिंग प्राधिकरण जारी किया जाता है तथा संबंधित कर्मचारियों को कार्य की जानकारी दी जाती है।
इसके बाद इंजन वैगनों अथवा कोचों से सुरक्षित रूप से जोड़ा जाता है। यदि इंजन पहले से जुड़ा हो, तो कपलिंग, एयर ब्रेक अथवा वैक्यूम ब्रेक, ब्रेक पाइप तथा अन्य आवश्यक उपकरणों की स्थिति की पुष्टि की जाती है।
निर्देश प्राप्त होने पर लोको पायलट निर्धारित गति से शंटिंग प्रारम्भ करता है। यदि वाहन को आगे की ओर ले जाना हो तो इंजन उन्हें धक्का देता है (Push)। यदि वाहन को अपनी दिशा की ओर लाना हो तो इंजन उन्हें खींचता है (Pull)।
पूरे समय लोको पायलट संबंधित शंटिंग स्टाफ द्वारा दिए जा रहे हैंड सिग्नल अथवा शंट सिग्नल का पालन करता है। गति इतनी नियंत्रित रखी जाती है कि आवश्यकता पड़ने पर वाहन को तुरंत रोका जा सके।
निर्धारित स्थान पर पहुँचने के बाद वाहन को सावधानीपूर्वक रोका जाता है। यदि आगे शंटिंग की आवश्यकता न हो, तो आवश्यकतानुसार कपलिंग खोली जाती है तथा वाहन को सुरक्षित किया जाता है।
पुश एवं पुल शंटिंग के दौरान नियंत्रण
इस प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि नियंत्रण किसी भी समय समाप्त नहीं होता। इंजन लगातार वैगनों से जुड़ा रहता है, इसलिए—
- गति पूरी तरह लोको पायलट के नियंत्रण में रहती है।
- आवश्यकता पड़ने पर तुरंत ब्रेक लगाया जा सकता है।
- किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में वाहन को नियंत्रित किया जा सकता है।
- वैगनों को निर्धारित स्थान पर अत्यंत सटीकता से रोका जा सकता है।
यही कारण है कि संवेदनशील परिचालन, यात्री गाड़ियों तथा महँगे माल वाले वैगनों की शंटिंग सामान्यतः इसी प्रणाली से की जाती है।
पुश एवं पुल शंटिंग की विशेषताएँ
यह प्रणाली पूर्णतः नियंत्रित (Controlled Movement) होती है। इसमें इंजन कभी भी वाहन से अलग नहीं होता, इसलिए लूज़ शंटिंग अथवा फ्लाई शंटिंग जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न नहीं होतीं।
इस विधि में शंटिंग स्टाफ एवं लोको पायलट के बीच निरंतर संपर्क बना रहता है। प्रत्येक मूवमेंट अधिकृत संकेत के आधार पर किया जाता है। यदि किसी कारण से संकेत स्पष्ट न हो, तो शंटिंग तुरंत रोक दी जाती है।
पुश एवं पुल शंटिंग के लाभ
पुश एवं पुल शंटिंग का सबसे बड़ा लाभ इसकी सुरक्षा है। इंजन द्वारा पूरे समय नियंत्रण बनाए रखने के कारण दुर्घटना की संभावना अत्यंत कम रहती है। वाहन पर अनावश्यक झटका नहीं लगता, जिससे कपलिंग, ब्रेक पाइप, कोच अथवा माल को क्षति पहुँचने की संभावना भी कम हो जाती है।
यात्री गाड़ियों के साथ शंटिंग, इंजन परिवर्तन, कोचिंग डिपो का परिचालन तथा अधिकांश यार्ड कार्य इसी प्रणाली द्वारा सुरक्षित रूप से सम्पन्न किए जाते हैं।
पुश एवं पुल शंटिंग की सीमाएँ
यद्यपि यह प्रणाली सबसे सुरक्षित है, फिर भी कुछ परिस्थितियों में इसमें अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है क्योंकि प्रत्येक मूवमेंट इंजन द्वारा नियंत्रित रूप से किया जाता है। किन्तु आधुनिक रेलवे परिचालन में सुरक्षा को समय से अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए यह सीमा व्यावहारिक रूप से स्वीकार्य मानी जाती है।
व्यावहारिक महत्व
वर्तमान समय में भारतीय रेल की अधिकांश शंटिंग इसी प्रणाली द्वारा की जाती है। जहाँ पहले लूज़ शंटिंग अथवा फ्लाई शंटिंग का उपयोग किया जाता था, वहाँ भी अब सुरक्षा कारणों से नियंत्रित पुश एवं पुल शंटिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।
यार्डों के आधुनिकीकरण, बेहतर संचार व्यवस्था, इंटरलॉकिंग तथा उन्नत ब्रेक प्रणाली के कारण यह प्रणाली और अधिक प्रभावी सिद्ध हुई है।
अध्ययन हेतु महत्वपूर्ण बिंदु
परीक्षा की दृष्टि से यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पुश एवं पुल शंटिंग वर्तमान भारतीय रेल की मानक एवं सर्वाधिक सुरक्षित शंटिंग प्रणाली है, क्योंकि इसमें इंजन पूरे समय वाहन से जुड़ा रहता है तथा सम्पूर्ण मूवमेंट लोको पायलट के नियंत्रण में होता है।

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