भारतीय समर्पित माल यातायात गलियारा निगम लिमिटेड (DFCCIL)
भारतीय समर्पित माल यातायात गलियारा निगम लिमिटेड (Dedicated Freight Corridor Corporation of India Limited – DFCCIL) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (Public Sector Undertaking – PSU) है, जिसकी स्थापना भारतीय रेलवे के माल परिवहन तंत्र को आधुनिक, दक्ष एवं विश्वस्तरीय बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसका निगमकरण 30 अक्टूबर 2006 को कंपनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत किया गया था। DFCCIL को विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle – SPV) के रूप में स्थापित किया गया, जिसे समर्पित माल यातायात गलियारों (Dedicated Freight Corridors) की योजना बनाने, निर्माण करने, अनुरक्षण करने तथा परिचालन करने का दायित्व सौंपा गया।
भारतीय रेलवे नेटवर्क पर लगातार बढ़ते यात्री एवं माल यातायात के कारण क्षमता संबंधी गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही थीं। अधिकांश मुख्य मार्गों पर लाइन क्षमता का उपयोग 100 प्रतिशत से अधिक हो चुका था, जिसके कारण मालगाड़ियों की औसत गति कम होती जा रही थी तथा वैगनों का टर्न राउंड समय बढ़ रहा था। इन समस्याओं के समाधान हेतु समर्पित माल यातायात गलियारों की अवधारणा विकसित की गई।
समर्पित माल यातायात गलियारे की आवश्यकता
स्वतंत्रता के पश्चात भारतीय रेलवे का विकास मुख्यतः मिश्रित यातायात प्रणाली (Mixed Traffic System) के रूप में हुआ, जहाँ यात्री एवं मालगाड़ियाँ एक ही मार्ग पर संचालित होती थीं। समय के साथ यात्री गाड़ियों की संख्या में तीव्र वृद्धि हुई, जिससे मालगाड़ियों को मार्ग उपलब्ध कराने में कठिनाई होने लगी। परिणामस्वरूप मालगाड़ियों की औसत गति लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित हो गई।
भारतीय अर्थव्यवस्था के तीव्र विकास, औद्योगीकरण, बंदरगाह आधारित व्यापार तथा ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं ने एक ऐसे रेल नेटवर्क की आवश्यकता उत्पन्न की जो केवल माल परिवहन के लिए समर्पित हो। इसी आवश्यकता के परिणामस्वरूप Dedicated Freight Corridor परियोजना की शुरुआत की गई।
DFCCIL का उद्देश्य
DFCCIL का मुख्य उद्देश्य भारतीय रेलवे के माल परिवहन को अधिक तीव्र, सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल तथा प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके माध्यम से रेलवे नेटवर्क पर भीड़ कम करना, मालगाड़ियों की गति बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना तथा उद्योगों एवं बंदरगाहों को बेहतर संपर्क प्रदान करना लक्ष्य है।
इसके अतिरिक्त यह परियोजना सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने तथा पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक टिकाऊ परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
पूर्वी समर्पित माल यातायात गलियारा (Eastern Dedicated Freight Corridor)
पूर्वी समर्पित माल यातायात गलियारा (EDFC) पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक विकसित किया गया है। इसकी कुल लंबाई लगभग 1337 किलोमीटर है। यह गलियारा मुख्य रूप से कोयला, इस्पात, उर्वरक, खाद्यान्न तथा अन्य भारी माल के परिवहन के लिए विकसित किया गया है।
पूर्वी भारत के कोयला क्षेत्रों, ताप विद्युत गृहों तथा इस्पात उद्योगों को यह गलियारा एक उच्च क्षमता वाला परिवहन मार्ग प्रदान करता है। इससे ऊर्जा क्षेत्र को निरंतर एवं विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिली है।
पश्चिमी समर्पित माल यातायात गलियारा (Western Dedicated Freight Corridor)
पश्चिमी समर्पित माल यातायात गलियारा (WDFC) उत्तर प्रदेश के दादरी से महाराष्ट्र स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (JNPT) तक विकसित किया गया है। इसकी कुल लंबाई लगभग 1506 किलोमीटर है।
यह गलियारा भारत के सबसे महत्वपूर्ण कंटेनर यातायात मार्ग के रूप में विकसित किया गया है। पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाहों, औद्योगिक क्षेत्रों तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को जोड़ने वाला यह गलियारा भारत के निर्यात एवं आयात व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पश्चिमी DFC की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता डबल स्टैक कंटेनर संचालन (Double Stack Container Operation) है, जिसके कारण एक ही ट्रेन में दो स्तरों पर कंटेनर लादकर परिवहन किया जा सकता है। इससे परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
DFC की तकनीकी विशेषताएँ
DFCCIL नेटवर्क को पारंपरिक भारतीय रेलवे नेटवर्क की तुलना में अधिक क्षमता एवं उच्च दक्षता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इन मार्गों पर उच्च धुरा भार (High Axle Load) वाली मालगाड़ियों का संचालन किया जा सकता है। सामान्य रेलवे मार्गों की तुलना में अधिक भार वहन क्षमता होने के कारण एक ही गाड़ी में अधिक माल परिवहन संभव हो पाया है।
DFC मार्गों को लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक की परिचालन गति को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इससे मालगाड़ियों की औसत गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा ट्रांजिट समय में कमी आई है।
पश्चिमी DFC पर विशेष High Rise Overhead Equipment (OHE) लगाया गया है, जिससे विद्युतीकृत मार्ग पर डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनों का संचालन संभव हो सका है। यह विश्व स्तर पर एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि मानी जाती है।
सिग्नलिंग एवं ट्रेन नियंत्रण प्रणाली
DFCCIL में आधुनिक सिग्नलिंग एवं ट्रेन नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया गया है। इसमें स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग, केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण तथा उन्नत ट्रेन संरक्षण प्रणालियों का समावेश किया गया है।
परिचालन नियंत्रण हेतु आधुनिक Operation Control Centres (OCC) स्थापित किए गए हैं। इन नियंत्रण केंद्रों से ट्रेनों की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है तथा परिचालन संबंधी निर्णय लिए जाते हैं। इससे सुरक्षा, समयबद्धता तथा परिचालन दक्षता में वृद्धि हुई है।
Long Haul एवं Heavy Haul Operation
DFCCIL नेटवर्क को Long Haul तथा Heavy Haul Train संचालन के लिए उपयुक्त बनाया गया है। Long Haul Operation में एक से अधिक मानक रेकों को जोड़कर लंबी मालगाड़ी का संचालन किया जाता है, जबकि Heavy Haul Operation में अधिक धुरा भार तथा अधिक भार क्षमता वाली मालगाड़ियों का संचालन किया जाता है।
इन व्यवस्थाओं के माध्यम से कम ट्रेन पथों में अधिक माल परिवहन संभव हुआ है तथा रेलवे की माल वहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
FOIS और DFC
DFCCIL नेटवर्क पर Freight Operations Information System (FOIS) का व्यापक उपयोग किया जाता है। इसके माध्यम से ट्रेनों की स्थिति, वैगनों की स्थिति, इंटरचेंज, रेक प्रबंधन तथा माल परिवहन गतिविधियों की निगरानी की जाती है।
FOIS के उपयोग से वास्तविक समय में परिचालन संबंधी जानकारी उपलब्ध होती है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
DFCCIL परियोजना का प्रभाव केवल रेलवे तक सीमित नहीं है। इसने भारत की संपूर्ण लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को प्रभावित किया है। माल परिवहन की गति बढ़ने, ट्रांजिट समय घटने तथा लागत कम होने से उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि हुई है।
बंदरगाहों से अंतर्देशीय क्षेत्रों तक माल परिवहन अधिक तेज एवं विश्वसनीय हुआ है। इससे निर्यात को बढ़ावा मिला है तथा औद्योगिक गलियारों के विकास को गति प्राप्त हुई है।
ऊर्जा दक्षता में वृद्धि एवं सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होने के कारण कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है, जो पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री गति शक्ति एवं DFC
वर्तमान समय में DFCCIL को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ एकीकृत किया जा रहा है। DFC के आसपास मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, गति शक्ति कार्गो टर्मिनल तथा औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
इससे रेल, सड़क, बंदरगाह एवं औद्योगिक अवसंरचना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है, जो भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता को नई दिशा प्रदान करेगा।
भविष्य के प्रस्तावित माल गलियारे
पूर्वी एवं पश्चिमी DFC की सफलता के पश्चात भारत सरकार द्वारा अन्य समर्पित माल गलियारों के विकास पर भी विचार किया जा रहा है। इनमें उत्तर-दक्षिण (North-South), पूर्व-पश्चिम (East-West), पूर्वी तट (East Coast) तथा अन्य संभावित गलियारे शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर भारत विश्व के सबसे बड़े समर्पित माल रेल नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो जाएगा।
LDCE Group-B परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
DFCCIL का निगमकरण 30 अक्टूबर 2006 को किया गया था। यह रेल मंत्रालय के अधीन पूर्णतः सरकारी स्वामित्व वाला उपक्रम है। पूर्वी DFC लुधियाना से सोननगर तथा पश्चिमी DFC दादरी से JNPT तक विकसित किया गया है। पश्चिमी DFC की प्रमुख विशेषता डबल स्टैक कंटेनर संचालन है। DFC मार्गों पर उच्च धुरा भार, उच्च गति माल परिचालन, Long Haul एवं Heavy Haul Train संचालन की सुविधा उपलब्ध है। आधुनिक FOIS, OCC तथा उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली इसके परिचालन की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
भारतीय समर्पित माल यातायात गलियारा निगम लिमिटेड भारतीय रेलवे के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना ने माल परिवहन की अवधारणा को नई दिशा प्रदान की है। Dedicated Freight Corridors के माध्यम से भारतीय रेलवे अधिक क्षमता, अधिक गति, कम लागत एवं बेहतर लॉजिस्टिक्स दक्षता की दिशा में आगे बढ़ रही है। भविष्य में प्रस्तावित नए गलियारों के विकसित होने पर भारत का माल परिवहन तंत्र और अधिक सशक्त, आधुनिक एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन जाएगा।

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