थ्रू-पुट (Throughput)
रेलवे परिचालन में किसी रेल खंड (Section) की कार्यकुशलता का आकलन करने के लिए थ्रू-पुट (Throughput) एक महत्वपूर्ण संकेतक (Performance Indicator) है। सामान्यतः किसी निश्चित अवधि, विशेषकर 24 घंटे में, किसी रेल खंड द्वारा वहन किए गए यातायात की मात्रा को उस खंड का थ्रू-पुट कहा जाता है।
थ्रू-पुट का उपयोग किसी रेल खंड की वास्तविक वहन क्षमता, परिचालन दक्षता तथा उपलब्ध अवसंरचना के उपयोग का आकलन करने के लिए किया जाता है। यह यात्री एवं माल दोनों प्रकार के यातायात पर लागू होता है, किन्तु माल परिचालन में इसका महत्व अधिक माना जाता है।
थ्रू-पुट की अवधारणा
रेलवे द्वारा किसी खंड पर जितना अधिक यातायात सुरक्षित एवं समयबद्ध रूप से संचालित किया जाता है, उस खंड का थ्रू-पुट उतना ही अधिक माना जाता है।
माल यातायात के संदर्भ में थ्रू-पुट का आकलन सामान्यतः निम्न आधारों पर किया जाता है—
संचालित वैगनों की संख्या
GTKM (Gross Tonne Kilometre)
NTKM (Net Tonne Kilometre)
इनमें से NTKM को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह वास्तविक भुगतान योग्य माल की ढुलाई को प्रदर्शित करता है।
माल थ्रू-पुट (Goods Throughput)
माल थ्रू-पुट किसी खंड में एक निश्चित अवधि में ढोए गए माल की मात्रा को दर्शाता है।
इसे निम्नलिखित आधारों पर व्यक्त किया जा सकता है—
1. वैगनों की संख्या
किसी खंड से गुजरने वाले कुल माल वैगनों की संख्या।
2. GTKM (Gross Tonne Kilometre)
ग्रॉस टन किलोमीटर में वैगनों, माल एवं स्वयं वैगन के भार सहित कुल वहन क्षमता को दर्शाया जाता है।
3. NTKM (Net Tonne Kilometre)
नेट टन किलोमीटर वास्तविक माल (Paying Load) की ढुलाई को दर्शाता है।
रेलवे योजनाओं, माल परिवहन प्रदर्शन तथा राजस्व विश्लेषण में सामान्यतः NTKM का उपयोग किया जाता है।
पैसेंजर थ्रू-पुट (Passenger Throughput)
पैसेंजर थ्रू-पुट किसी खंड पर ढोए गए यात्रियों की संख्या एवं उनके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
सूत्र
Passenger Throughput = यात्रियों की संख्या × तय की गई दूरी (किमी)
यह किसी रेल खंड की यात्री परिवहन क्षमता का संकेत देता है।
रेल ट्रैक थ्रू-पुट
रेल ट्रैक थ्रू-पुट का संबंध मुख्य रूप से Gross Million Tonnes (GMT) से होता है।
GMT के आधार पर—
रेल पथ की आयु का निर्धारण
ट्रैक अनुरक्षण योजना
रेल नवीनीकरण कार्यक्रम
अल्ट्रासोनिक परीक्षण
ट्रैक क्षमता विश्लेषण
किए जाते हैं।
थ्रू-पुट एवं खंड क्षमता का संबंध
खंड क्षमता (Section Capacity) तथा थ्रू-पुट में घनिष्ठ संबंध होता है, किन्तु दोनों समान नहीं हैं।
खंड क्षमता किसी रेल खंड पर संचालित की जा सकने वाली गाड़ियों की अधिकतम संख्या को दर्शाती है, जबकि थ्रू-पुट उस खंड द्वारा वास्तविक रूप से वहन किए गए यातायात को दर्शाता है।
कई बार खंड क्षमता बढ़ाए बिना भी प्रति ट्रेन लोड बढ़ाकर थ्रू-पुट में वृद्धि की जा सकती है।
थ्रू-पुट बढ़ाने के उपाय
1. प्रति ट्रेन लोड बढ़ाकर
थ्रू-पुट बढ़ाने का सबसे प्रभावी उपाय प्रति ट्रेन वहन किए जाने वाले भार को बढ़ाना है।
इसके लिए—
उच्च क्षमता वाले वैगनों का उपयोग
उच्च एक्सल लोड
BOXNHL, BOBRN, BOBSN जैसे आधुनिक वैगनों का उपयोग
वैगन टेयर वेट में कमी
महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. Long Haul एवं Heavy Haul संचालन
वर्तमान भारतीय रेलवे में थ्रू-पुट बढ़ाने हेतु Long Haul तथा Heavy Haul ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
Python तथा Anaconda जैसी Long Haul Trains के माध्यम से एक ही ट्रेन पथ में अधिक माल ढोया जा सकता है।
Heavy Haul Operation के माध्यम से उच्च एक्सल लोड वाली मालगाड़ियों का संचालन किया जाता है।
3. Dedicated Freight Corridor (DFC)
Dedicated Freight Corridors के परिचालन से मालगाड़ियों की औसत गति, वहन क्षमता तथा थ्रू-पुट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
DFC पर—
अधिक लंबी गाड़ियाँ
अधिक भार
अधिक गति
संभव हो पाई है।
4. उच्च क्षमता वाले लोकोमोटिव
उच्च हॉर्स पावर वाले विद्युत लोकोमोटिवों के उपयोग से अधिक भार वाली मालगाड़ियों का संचालन संभव हुआ है।
WAG-9, WAG-12 तथा अन्य आधुनिक माल इंजन थ्रू-पुट वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
5. Distributed Power System (DPS)
Distributed Power System के उपयोग से लंबी एवं भारी मालगाड़ियों का सुरक्षित संचालन संभव होता है।
इससे—
ड्रॉबार बल कम होता है।
ट्रेन पार्टिंग की संभावना कम होती है।
अधिक भार ढोया जा सकता है।
6. लूप लाइन क्षमता में वृद्धि
लंबी मालगाड़ियों के संचालन हेतु पर्याप्त लंबाई वाली लूप लाइनों का निर्माण आवश्यक है।
Long Haul एवं Heavy Haul Operation के लिए लूप लाइन क्षमता बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
7. टर्मिनल दक्षता में सुधार
लोडिंग एवं अनलोडिंग समय कम करके भी थ्रू-पुट बढ़ाया जा सकता है।
इसके लिए—
यांत्रिक लोडिंग
Rapid Loading System
Mechanised Handling
Automatic Wagon Loading
का उपयोग किया जाता है।
8. वैगन टर्न राउंड समय कम करना
वर्तमान रेलवे परिचालन में Wagon Turn Round Time एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन सूचकांक है।
वैगनों की शीघ्र उपलब्धता से अधिक माल ढुलाई संभव होती है तथा थ्रू-पुट बढ़ता है।
9. सिग्नलिंग एवं संचार प्रणाली में सुधार
आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली, Automatic Block Signalling, Electronic Interlocking तथा केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण (CTC) के माध्यम से रेल खंड की क्षमता एवं थ्रू-पुट दोनों में वृद्धि की जा सकती है।
10. FOIS आधारित माल परिचालन
Freight Operations Information System (FOIS) के माध्यम से—
Wagon Tracking
Rake Management
Loading Monitoring
Detention Analysis
अधिक प्रभावी रूप से किया जा सकता है, जिससे थ्रू-पुट में वृद्धि होती है।
थ्रू-पुट रेलवे परिचालन का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन संकेतक है, जो किसी रेल खंड की वास्तविक वहन क्षमता को प्रदर्शित करता है। आधुनिक भारतीय रेलवे में Long Haul Operation, Heavy Haul Operation, Dedicated Freight Corridor, Distributed Power System, उच्च क्षमता वाले वैगन एवं FOIS आधारित प्रबंधन के माध्यम से थ्रू-पुट में निरंतर वृद्धि की जा रही है। भविष्य में माल परिवहन क्षमता बढ़ाने के लिए थ्रू-पुट वृद्धि रेलवे की प्रमुख रणनीति बनी रहेगी।

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